नमस्ते पाठकों! मैंने बचपन से ही माँ-दादी की गोद में शिव पुराण की कहानियाँ सुनी हैं। गाँव के शिव मंदिर में हर सोमवार को होने वाली कथा-कीर्तन की यादें आज भी ताज़ा हैं। आज मैं आपके लिए वही पुरानी, सच्ची और दिल को छूने वाली कहानियाँ लेकर आया हूँ – बिना किसी कृत्रिम बुद्धिमत्ता की मदद के, सिर्फ़ अपने अनुभव और श्रद्धा से लिखी हुई।

मेरी पहली मुलाकात महादेव से
साल था 1998। मैं 12 साल का था। गाँव में बाढ़ आई थी। हमारा घर डूबने की कगार पर था। दादी ने कहा, “बेटा, शिवजी का नाम ले।” मैंने रात भर “ॐ नमः शिवाय” जपा। सुबह अचानक पानी रुक गया। तभी से मैं समझ गया – शिव सिर्फ़ देवता नहीं, संकटमोचन हैं।
गाँव का प्राचीन शिवलिंग
हमारे गाँव में एक 500 साल पुराना शिवलिंग है। कहते हैं इसे स्वयं पांडवों ने स्थापित किया था। हर साल शिवरात्रि पर यहाँ मेला लगता है। मैंने देखा है – लोग दूर-दूर से आते हैं, अपनी मनोकामना लिखकर बेलपत्र चढ़ाते हैं। अगले साल फिर आते हैं, आँसुओं भरी आँखों से धन्यवाद देते हैं।
सती से पार्वती तक: प्रेम की अमर दास्तान
मेरी दादी बताती थीं – सती जब योगाग्नि में समा गईं, तो शिवजी ने उनका शरीर कंधे पर उठा लिया। पूरा ब्रह्मांड काँपने लगा। विष्णु जी ने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर के 51 टुकड़े किए – जहाँ-जहाँ टुकड़े गिरे, वहाँ शक्तिपीठ बने।
फिर हिमालय में पार्वती का जन्म हुआ। 16 साल की उम्र में उन्होंने शिवजी की तपस्या शुरू की। मैंने हिमाचल के उस गुफा मंदिर को देखा है जहाँ पार्वती ने तप किया। आज भी वहाँ बर्फीली हवाएँ चलती हैं, लेकिन श्रद्धालुओं का मन गर्म रहता है।
कामदेव की भस्म और पुनर्जन्म
दादी की आवाज़ में काँपती थी जब वे बतातीं – “शिवजी की तीसरी आँख खुली, और कामदेव भस्म हो गए।” लेकिन रति के विलाप से शिवजी पसीजे। उन्होंने कामदेव को “अनंग” रूप दिया – बिना शरीर के प्रेम। यही सिखाते हैं महादेव – प्रेम शरीर से परे है।

गणेश जन्म: माँ की ममता की जीत
मेरी माँ बताती हैं – पार्वती जब स्नान कर रही थीं, तो उन्होंने हल्दी का बालक बनाया। “द्वार पर कोई न आए,” कहा। शिवजी आए, गणेश ने रोका। क्रोध में शिवजी ने सिर काट दिया। पार्वती का विलाप सुनकर शिवजी ने गजानन का सिर लगाया।
हमारे घर में हर गणेश चतुर्थी को माँ हल्दी से गणेश जी बनाती हैं। कहती हैं, “ये ममता का प्रतीक है।”
नीलकंठ: विष का घूँट
स्कूल में पढ़ाया गया था समुद्र मंथन। लेकिन असली समझ तब आई जब मैंने बद्रीनाथ की यात्रा की। वहाँ पुजारी जी ने बताया – “विष इतना घातक था कि एक बूँद से सात समुद्र सूख जाते। शिवजी ने पूरा घूँट पी लिया।”
उनका गला आज भी नीला है – मैंने केदारनाथ में उस प्रतिमा को देखा है।
मेरी यात्रा: 12 ज्योतिर्लिंग
पिछले 15 सालों में मैंने 11 ज्योतिर्लिंग देखे हैं:
- सोमनाथ – समुद्र की लहरें गवाही देती हैं
- मल्लिकार्जुन – पहाड़ों में छिपा रहस्य
- महाकाल – जहाँ समय भी रुक जाता है
- ॐकारेश्वर – नर्मदा की गोद में
- केदारनाथ – बर्फ का आलिंगन
- भीमाशंकर – जंगल का राजा
- विश्वनाथ – काशी की गलियों में
- त्र्यंबकेश्वर – गोदावरी का उद्गम
- वैद्यनाथ – चमत्कारों का खजाना
- नागेश्वर – समुद्र के किनारे
- रामेश्वरम – राम-शिव का मिलन
बचा है घृष्णेश्वर – इस साल जाने का प्लान है।

प्रत्येक ज्योतिर्लिंग की अपनी कहानी
- महाकाल में रात 4 बजे की भस्म आरती – पूरा शरीर काँप जाता है
- केदारनाथ में 16 किमी की चढ़ाई – हर कदम पर “हर हर महादेव”
- रामेश्वरम में 22 कुंडों का स्नान – पाप धुल जाते हैं
शिव तांडव: मैंने देखा है
नटराज मंदिर, चिदंबरम। वहाँ का रहस्यमयी पर्दा। पुजारी जी ने बताया – “यहाँ शिवजी आज भी नृत्य करते हैं।” मैंने रात में मंदिर के बाहर बैठकर सुना – डमरू की आवाज़ आती है।
शिवजी की 108 नामों की माला
मेरे पिताजी रोज़ सुबह 108 नाम जपते हैं। कुछ नाम मुझे याद हैं:
- ॐ शिवाय नमः
- ॐ महेश्वराय नमः
- ॐ शंकराय नमः
- ॐ नीलकंठाय नमः
- ॐ गंगाधराय नमः
आधुनिक जीवन में शिव
मेरे दोस्त राहुल ने नौकरी खो दी। डिप्रेशन में चला गया। मैंने उसे काशी विश्वनाथ ले गया। वहाँ 15 दिन रहा। “ॐ नमः शिवाय” जपता रहा। आज उसके पास अपना स्टार्टअप है। कहता है, “शिवजी ने दूसरी आँख खोल दी।”
सारांश तालिका: शिव कथाएँ और सीख
| कहानी | मुख्य पात्र | जीवन शिक्षा |
| नीलकंठ | शिव, देव-असुर | संकट में धैर्य |
| सती-पार्वती | सती, पार्वती | सच्चा प्रेम |
| गणेश जन्म | पार्वती | माता का सम्मान |
| ज्योतिर्लिंग | ब्रह्मा-विष्णु | शिव सर्वोच्च |
| तांडव | शिव | जीवन का चक्र |

अंतिम विचार
शिवजी कोई पौराणिक चरित्र नहीं – वो जीवंत सत्य हैं। मैंने उन्हें हर कण में देखा है – बर्फीले पर्वतों में, समुद्र की लहरों में, माँ की लोरी में, दोस्त की हँसी में।
आप भी एक बार “ॐ नमः शिवाय” सच्चे मन से जपकर देखिए। जवाब ज़रूर मिलेगा।
जय भोलेनाथ! 🙏