New Hindi Story – एक समय की बात है कि एक गांव से थोड़ी दूर एक इच्छा पूरी करने वाला  कुआं था और सभी लोग इच्छाओं को पूरा करने के लिए कुएं के पास आते हैं और अपनी इच्छा हुए के सामने बोलते और कुएं में सिक्का डाल देते थे और कुछ ही दिनों बाद सभी की इच्छाएं पूरी हो जाती थी  गांव के लोग तरह-तरह की इच्छाएं मांगा करते थे जैसे बंगला गाड़ी, धन दौलत जैसी इच्छा मांगा करते थे

परंतु जैसे-जैसे कुआं बुड्ढा हो रहा था उसकी शक्ति कम होती जा रही थी एक समय ऐसा आया कि लोग कुए से इच्छाएं तो मांग रहे थे परंतु वह अच्छा पूरी नहीं हो रही थी क्योंकि कुए की शक्ति चली गई थी और लोगों की इच्छा पूरा ना होने के कारण कुआं भी बहुत ही उदास था कुआं मन में सोच रहा था की लोग मेरे पास अपनी इच्छाएं लेकर आते हैं और सोचते हैं कि मैं इनको पूरा कर दूंगा परंतु मैं उनकी इच्छाएं पूरा करने में असफल हो गया हूं

मैं उनको खुश नहीं रख पा रहा हूं और एक बार एक नन्ही लड़की जिसका नाम रेशमा था वह कुएं के पास आती है और  कुए से कहती है कि मेरे मम्मी पापा दोनों ही सुबह काम के लिए निकल जाते हैं परंतु मैं घर पर अकेले बोर हो जाती हूं और मेरा कोई दोस्त भी नहीं है कि मैं उनके साथ खेल पाऊं इसलिए मुझे एक दोस्त दे दो जो मेरे साथ खेल सके और मैं अपना पूरा समय उसके साथ बिता सकूं

कुआं उस नन्ही लड़की की इच्छाएं सुनकर और उसे ना पूरा होने के डर से रोने लगता है और भगवान से यह प्रार्थना करता है कि भले ही मेरी पूरी शक्ति चली गई हो परंतु इस नन्ही लड़की की इच्छा पूरा करने के लिए मुझे थोड़ी देर के लिए ही वह शक्ति  दे दो परंतु उसकी शक्ति नहीं आती और वह रोने लगता है

पास ही के जंगल में एक परी रोने की आवाज सुनकर उस कुएं के पास आती है और कहती है कि तुम क्यों रो रहे हो कुआं कहता है कि लोग मेरे पास अपनी एक चाय लेकर आते हैं और वह सोचते हैं कि मैं उनकी इच्छाओं को पूरा करूंगा परंतु मेरी शक्ति खत्म हो जाने के कारण मैं उन इच्छाओं को पूरा नहीं कर पा रहा हूं इसकी वजह से मैं बहुत ही परेशान हूं क्या आपके पास इसका कोई हल है और आप मेरी शक्ति वापस कर सकते हो

परी कहने लगती है कि मेरे पास तो इसका कोई हल नहीं परंतु दोस्त मत रो मैं पहाड़ पर रहने वाले उस इच्छा पूरे करने वाले कछुए से इसका हल पूछ कर तुम्हें जरूर बताऊंगी और  परी उस पहाड़ की तरफ होने लगती है और कुछ ही देर बाद परी उस कछुए के पास पहुंच जाती है जो इच्छापूर्ति कछुए के नाम से भी जाना जाता है और इच्छापूर्ति कछुआ परी से कहता है  क्या मैं तुम्हारे यहां आने की वजह पूछ सकता हूं परी कहती है

मेरा दोस्त इच्छा पूरा करने वाला कुआं वह बहुत ही परेशान है क्योंकि बुड्ढा होने के कारण उसकी सारी शक्ति चली गई है क्या आप ऐसा कोई हाल बता सकते हो जिसकी वजह से उसकी सारी शक्ति आ जाए और वह लोगों की इच्छाएं दोबारा पूरी करने लगे इच्छापूर्ति कछुआ ने कहा क्या तुम वह नदी देख रहे हो परी कहती है हां मैं वह नदी देख सकती हूं इच्छापूर्ति कछुआ कहता है बस तुम्हें इस नदी का थोड़ा जल ले जाकर उस कुएं में जाकर मिलाना है और वह कुआं फिर दोबारा से लोगों की इच्छाएं पूरा कर  सकेगा

 परी उस नदी का थोड़ा सा जल ले जाती है और कुएं में मिला देती है और फिर से कुएं की सारी शक्ति वापस आ जाती है और और सभी की इच्छाएं पूरी होने लगती है और कुछ ही दिनों में वह नन्ही लड़की कुएं के पास आती है और कहती है धन्यवाद मुझे  एक दोस्त देने के लिए जो मेरे साथ दिन भर खेल सके

उस नन्ही लड़की की इच्छाएं पूरा करने के बाद वह कुआं बहुत ही खुश होता है और उस दिन से  वह सभी लोगों की इच्छाएं पूरा करने के लिए तैयार रहता है

आलसी बना अमीर (New Hindi Story)

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एक समय की बात है एक गुरु और शिष्य दोनों ही गांव की यात्रा में निकलते हैं परंतु पूरे दिन यात्रा करने के बाद वह दोनों थक जाती है और एक घर के पास आकर रुक जाते हैं  और गेट खटखटा कर थोड़ा पानी मांगते हैं और एक आदमी आता है और गुरु जी को पानी दे देता है गुरुजी उस आदमी से पूछते हैं तुम्हारे पास इतनी सारी जमीन है परंतु तुम इस पर खेती क्यों नहीं करते हो वह आदमी कहता है

मैं गाय का दूध बेच कर अपना जीवन आसानी से व्यापन कर रहा हूं तो मुझे इतनी मेहनत करने की क्या जरूरत है गुरुजी को उसकी यह बात बिल्कुल पसंद नहीं आती परंतु वह उसे कुछ नहीं कहते और गुरु जी उस आदमी से कहते हैं कि क्या हम दोनों यहां पर एक रात के लिए  रुक सकते हैं वह आदमी कहता है हां आप दोनों यहां आराम से रोक सकते हो और किसी चीज की जरूरत हो तो मुझे बता देना

वह आदमी और उसके परिवार वाले सब सो रहे थे और गुरु जी  भी सो रहे थे और गुरुजी का शिष्य भी परंतु आधी रात होने पर गुरुजी अपने शिष्य को  उठाते हैं और कहते हैं चलो हम दोनों इसकी गाय को लेकर यहां से चले जाते हैं वैसी से समझ नहीं पाता है कि मेरे गुरु जी मुझे क्या करने को कह रहे हैं मेरे गुरु जी मुझे चोरी करने को कह रहे हैं परंतु वह बड़ी कठिन विपदा में था और उसे अपने गुरु जी की बात मान ली थी इसलिए बिना पूछे ही उसने गाय को रस्सी से खोला और जंगल की तरफ दोनों निकल गए और जंगल की तरफ जाते जाते उन दोनों ने उस गाय को वहीं पर छोड़ दिया

सुबह होने पर वह आदमी देखता है कि ना तो गुरु जी है ना तो उनका शिष्य और ना ही मेरी गाय है कुछ देर के लिए तो वह सोचता ही रहता है कि अब मेरा जीवन यापन कैसे होगा परंतु कुछ दिनों बाद जब उसके पास जीवन यापन करने के लिए सब कुछ खत्म हो जाता है तो वह सोचता है अब तो मेरे पास सिर्फ एक ही तरीका है चलो जमीन पर खेती की जाए और खेती करके ही जीवन यापन किया जाए और उसने खेती करना शुरू कर दिया

गुरुजी का शिष्य अब बहुत बड़ा ज्ञानी बन चुका था और उसने सोचा चलो अपनी गलती को सुधार लिया जाए और उस आदमी की कुछ मदद की जाए जिसके साथ हमने बहुत वर्षों पहले कुछ गलत किया था और गुरुजी का शिष्य उस गांव की तरफ निकल जाता है और जब वह वहां जाता है तो देखता है

कि उसके खेत में फलों के बागान लगे हुए हैं वह सोचता है कि वह आदमी अपने खेत बेचकर वहां से चला गया है इसीलिए वहां पर कोई और खेती कर रहा है परंतु जैसे ही गुरुजी का शिष्य वहां से जा रहा होता है तभी वह उस आदमी को देख लेता है और उस आदमी से कहता है क्या आपने मुझे पहचाना , वह आदमी गुरु जी के शिष्य को पहचानने से नमना कर देता है

परंतु गुरुजी का शिष्य उसे उस रात के बारे में बताता है तो वह आदमी उसकी बातों पर विश्वास कर लेता है और कहता है मुझे तो पता नहीं आप लोग रात में कहां चले गए थे और मेरी गाय भी ना जाने कहां भाग गई और उसके बाद मेरे पास ना कोई साधन था जिसके द्वारा मैं अपना जीवन यापन कर सकूं

इसीलिए मैंने खेती करना शुरू कर दिया और खेती करते करते मुझे पता चला कि मैं एक आलसी इंसान नहीं हूं मैं अपनी इच्छा से अधिक मेहनत कर सकता हूं और अधिक से अधिक पैसे भी कमा सकता हूं और वह आदमी अब गांव का सबसे अधिक धनी आदमी बन चुका था

गुरुजी का शिष्य कहता है अब मुझे समझ आया मेरे गुरुजी मुझे क्या सिखाना चाहते थे अब मैं सब कुछ समझ चुका हूं मेरे गुरुजी मुझे सिखाना चाहते थे कि अगर आपको सफल होने से कोई चीज रोक रही है तो वो आप खुद हो जो आपको आगे बढ़ने से रोकती है उस चीज को ही मिटा दिया जाए तो आदमी बहुत आगे बढ़ सकता है और गुरुजी का शिष्य कहता है तुम्हारे रूप में मैंने ऐसे ही आदमी को देखा है

सीख – अगर हमें कहीं लगता है कि हमें कोई चीज रोक रही है तो विश्वास मानिए हमें उस चीज को जल्दी से जल्दी अपने जीवन से हटा देना चाहिए क्योंकि अगर आप उस  रुकावट को हटा देंगे तो मेरे ख्याल से आप अच्छा जीवन जी सकते हैं और अपने जीवन को अच्छा बना सकते हैं

तीन भाइयों की कहानी (New Hindi Story)

Gyanvardhak और shiksha prad kahaniya
Gyanvardhak और shiksha prad kahaniya

 एक बहुत समय पहले की बात है कि बिलासपुर नामक गांव में तीन भाई रहा करते थे तीनो भाई के नाम थे रमेश, सुरेश और सोनू  परंतु तीनों भाइयों की आपस में नहीं बनती थी और तीनो भाई एक दूसरे से जलते हो नफरत करते थे और उन तीनों को साथ में काम करना भी अच्छा नहीं लगता था 

वह तीनों अपनी मां के साथ खेत में जाकर अपनी मां का हाथ बताया करते थे ताकि काम जल्दी से जल्दी हो जाए और उनके पिता का निधन बचपन में ही हो गया था इसके कारण उसकी मां पर सारे घर की जिम्मेदारी आ गई थी और  उनकी मां इस जिम्मेदारी को पूरी तरह निभाती रही थी तीनों भाइयों को एक ही काम करने के लिए कहती जैसे एक ही खेत में तीनों भाइयों को बीज बोने के लिए कहती ताकि तीनो भाई एक दूसरों को अच्छी तरह जान सके और एक दूसरे की बात भी मान सकें

 कुछ समय बाद कुछ समय बाद उनकी मां की तबीयत बहुत खराब हो गई और उनकी मां ने उन तीनों को बुला कहां मुझे लगता है कि मैं ज्यादा दिन तक  जीवित नहीं रह पाऊंगी इसलिए मैं चाहती हूं तुम तीनों अपने लिए एक शानदार और मजबूत घर बना लो और तुम तीनों साथ में मिलकर रहो यह यह बात सुनकर तीनों एक दूसरे की शक्ल देखने लगे परंतु बड़ा भाई मां के बारे में सोच रहा था और मां की इच्छा के बारे में सोच रहा था इसलिए  रमेश ने मां से कहा चिंता मत करो मां हम तीनों साथ में एक ही घर में रहेंगे और एक अच्छे से और शानदार से घर में होंगे बस तुम जल्दी से सही हो जाओ

 इतना सुनते ही सुरेश और सोनू ने रमेश को घर से बाहर बुलाया और कहने लगे हम दोनों अलग अलग रहना चाहते हैं और हम दोनों अपने अलग-अलग घर बनाएंगे रमेश को यह बात बहुत बुरी लगी परंतु उसने अपने भाइयों को समझाने की कोशिश की और कहा यह मां की इच्छा है इसीलिए मैंने ऐसे कहा और मैं तो मां को अच्छा होते हुए देखना चाहता हूं

 परंतु कुछ महीनों बाद ही उनकी मां की मृत्यु हो जाती है और मृत्यु के बाद सुरेश और सोनू रमेश से कहते हैं हम दोनों को हमारा हिस्सा दे दो और हम अपना  अलग घर बना लेंगे और रमेश मजबूर था इसलिए उसने दोनों भाइयों को उनका हिस्सा दे दिया और सुरेश और सोनू दोनों अपने घर बनाने की तैयारी में लग गए सुरेश सोच रहा था कि मैं अपना घर बॉस और सूखी घास से बनाऊंगा जिसके कारण ज्यादा खर्चा भी नहीं होगा एक अच्छा खासा घर भी बन जाएगा

सोनू सोच रहा था कि मैं अपना घर लकड़ी से बना लूंगा ताकि घर ठंडा हो और मैं अच्छी तरीके से सो पाऊं परंतु रमेश अपनी मां की इच्छा के अनुसार एक अच्छा खासा और मजबूत घर बनाने की तैयारी कर रहा था परंतु उसके पास इतने पैसे नहीं थे इसलिए उसने थोड़ा पैसे जुटाने के लिए काम किया और जब उसके पास घर बनाने लायक पैसे हो गए तो वह पत्थर खरीदने और सीमेंट खरीदने के लिए दुकान पर गया और  घर बनाने का सामान ले आया और अगले दिन से घर बनाना शुरू कर दिया और कुछ महीनों बाद ही उसका घर भी बनकर तैयार हो जाता है

 एक दिन गांव में आंधी तूफान आ जाता है और जिसके कारण सभी कच्चे घर टूट जाते हैं और  सुरेश और सोनू का भी घर टूट जाता है और बारिश में दौड़ते दौड़ते दोनों रमेश के घर के पास आते हैं और देखते हैं रमेश का घर तो अभी तक मजबूती से खड़ा है और गेट खटखटा कर कहते हैं हमें अंदर आने दो हमारा घर इस तूफान की वजह से उड़ गया रमेश कहता है

आओ अंदर आ कर बात करेंगे और  वह दोनों अंदर जाते हैं और रमेश उन दोनों से कहता है मैंने तो मां के अनुसार ही अपना घर बनाया था इसीलिए कहा जाता है अगर नींव मजबूत हो तो कोई आंधी तूफान और कोई बड़ी ताकत भी तुम्हारे घर और तुम्हारे विश्वास को नहीं हिला सकती है और मुसीबत में अपने ही काम आते हैं

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