Vikram aur betal ki kahaniya

विक्रम बेताल को पकड़कर ले जा रहा था (Vikram aur betal ki kahaniya) पर शर्त के अनुसार रास्ते में बेताल विक्रम को कहानी सुनाता है और दोनों के बिच शर्त लगती है की अगर विक्रम ने कहानी के दौरान कुछ बोला तो बेताल दुबारा उड़ जायेगा और इस तरह विक्रम कहानी सुनाता है

स्वर्ण देश की king की 4 बेटियां थी और चारों के  चारों बड़े ही नाजुक थी बड़ी राजकुमारी इतनी नाजुक थी  कि सिर्फ चांद की रोशनी से ही उनकी त्वचा झुलस जाती इसलिए वह हमेशा साए में रहती और दूसरी राजकुमारी इतनी नाजुक थी कि त्वचा पर अगर फूल की  पंखुड़ी गिर जाती तो दाग पड़ जाता इसलिए वह कभी बाहर ही नहीं जाती थी तीसरी राजकुमारी तो हल्का सा शोर सुन कर बेहोश हो जाती थी

इसलिए उनके सामने सब धीरे-धीरे बात करते थे और छोटी राजकुमारी को अगर कोई छू भी रहता तो त्वचा पर दाग पड़ इसलिए  सेविकाओं को इन राजकुमारियों का खास ख्याल रखना पड़ता था राजा ने कहा मुझे अपनी बेटियों से बहुत प्यार है लेकिन अब उनकी शादी की चिंता सताने लगी है और वहां पर खड़ी एक दासी  ने कहा राजा आप चिंता ना करें पड़ोसी देश के राजाओं और राजकुमारों के रिश्ते आ रहे हैं

Vikram aur betal ki kahaniya

राजा मैं भी यह सब जानता हूं लेकिन शादी के बाद मेरी बेटियां वहां कैसे रहेंगे और  तभी दासी ने कहा मैं एक वेद को जानती हूं जो आयुर्वेद के विद्वान है आप कहे तो मैं उसे आपके पास  भेजूं राजा ने कहा क्या वह मेरी बेटियों का इलाज कर पाएगा हां कर लेंगे महाराज राजा उन्हें कल ही बुला लो उनके आदेश पर उन्हें वहां बुलाया गया

जब दासी कहीं जा रही थी तो उन्होंने एक बुजुर्ग आदमी दिखा दासी ने  कहा तुम कौन हो तुम्हें क्या चाहिए बाबा मैं गरीब किसान हूं बाढ़ में मेरा सब कुछ खत्म हो गया है अब मेरे पास कुछ नहीं बचा है मेरी चिंता है कि मैं अब अपनी बेटी की शादी कैसे करूंगा बुजुर्ग आदमी को उसने कुछ गहने और धन दिए और कहां की इसी से अपनी बेटी की शादी कर  देना जब राजकुमारियों ने सेविका से पूछा कि जो जेवरात हमने दिए थे कहां है

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तब दासी ने कहा मैंने वह जेवरात एक जरूरतमंद को दे दिए हैं राजकुमारियों ने कहा क्या जो तोहफा हमने दिया तुमने वह किसी और को दे दिया हां हां इतनी हिम्मत तुम्हारी जाओ तो मैं तुम्हें नौकरी से निकालती हूं जाओ कभी अपना चेहरा मत दिखाना तभी वेद आया और बोला महाराज की जय हो राजकुमार मैं एक वैध हूं मुझे दासी ने भेजा है राजा ने कहा  हां मुझे याद आया

आप आयुर्वेद के जानकार है आपके बारे में बहुत सुना है क्या आप मेरी बेटियों को इलाज कर पाएंगे वेद ने कहा राजकुमारी को क्या हुआ है राजा ने कहा वह बहुत नाजुक और कमजोर है जब राजा ने वेद को राजकुमारियों के बारे में सब कुछ बताया तो वह जोर-जोर से हंसने लगा

तभी बेताल ने ने विक्रम से पूछा कि बताओ विक्रम वेद राजा की बातें सुनकर क्यों हंसने लगा और विक्रम ने कहा क्योंकि राजकुमारी को कुछ हुआ ही नहीं

फिर बेताल ने कहा विक्रम तुम ऐसा कैसे कह सकते हो तुम कुछ कहने से पहले यह जान लो कुछ  महीने बाद क्या हुआ था बड़ी राजकुमारी ने जब शादी के बाद एक बेटे को जन्म दिया तो उसके साथ भी वही हुआ था जब वह एक बार सूर्य की रोशनी में आया था विक्रम ने कहा राजकुमारी के बेटे को भी यही बीमारी थी पर वैद्य ने राजकुमारी को ठीक कर दिया था

लेकिन बीमारी शायद खानदानी थी इसलिए वह उनके बेटे को भी हुआ बेताल ने कहा फिर नाजुक और नेक दिल किसे कहोगे तो विक्रम ने  कहां वह दासी जिसने अपने सारे गहने बुजुर्ग किसान को दे दिए

बेताल ने कहा विक्रम तुम्हें चुप रहने का वादा तोड़ दिया है इसलिए मैं चला तभी विक्रम ने बेताल के पैरों को पकड़ लिया और बेताल ने कहा विक्रम तुम ऐसा मेरे साथ ऐसा क्यों कर रहे हो विक्रम ने कहा बेताल तुम मेरे साथ साल बाजी कर रहे हो अगर अब तुमने मेरे साथ बेईमानी कि मैं तुम्हें नहीं छोडूंगा बेताल ने कहा ठीक है नहीं करूंगा अब तो पकड़ ढीली करो मैं यहां से नहीं भाग रहा |

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