Farmer son unity story in hindi

एक समय की बात है श्यामपुर नामक गांव में एक किसान रहा करता था और उसके चार बेटे भी उसी के साथ रहा करते थे परंतु चारों बेटे आपस में हमेशा लड़ते झगड़ते रहते थे किसान उन चारों बेटों को समझा समझा कर हार गया था वह हर दिन एक नई तरकीब सोचता और उन चारों बेटों को समझाने की कोशिश करता हूं

परंतु वह चारों समझते ही नहीं 1 दिन किसान ने चारों को एक खेत में काम करने के लिए बुलाया और चारों से कहा इस खेत में कल बीज बोने है इसीलिए आज तुम सबको इस खेत को खोदना है चारों बेटे इस बात पर लड़ने लगे कि मैं इस खेत का इतना हिस्सा को खोदूंगा

इस बात को सुनकर किसान बोलने लगा हूं चलो मैं इस खेत के चार हिस्से कर देता हूं और तुम चारों एक एक भाग खोद देना परंतु कुछ देर बाद चारों आपस में लड़ने लगे कि मैं वह वाला हिस्सा लूंगा की मैं वह वाला हिस्सा लूंगा और चारों आपस में हाथापाई करने लगते हैं यह देख किसान बोलता है जाओ मूर्खों घर जाओ और घर जाकर कुछ काम करो और चारों घर के तरफ निकल जाते हैं

मां सभी के लिए एक आम काटती है परंतु चारों इस बात पर लड़ने लगते हैं कि मैं वह वाला हिस्सा लूंगा मां आती है और फिर चारों को अलग अलग आम काट कर देती है शाम को जब किसान घर को आता है तो  वह इस बात को जानकर उन चारों को खूब सुनाता है कि तुम चारों सिर्फ एक आम के लिए भी लड़ना शुरू कर देते हो खेत में तो तुम चारों से काम नहीं होता

अगले दिन किसान सोचता है चलो बच्चों के लिए थोड़े कपड़े खरीद लिया जाए और वह कपड़े की दुकान में जाता है और चार  shirt पसंद करके लाता है और जैसे ही घर आता है कहता है बच्चों देखो मैं तुम्हारे लिए क्या लाया हूं जैसे ही किसान घर में घुसता है चारों बेटे उस पर झपट जाते हैं
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और अपना अपना shirt ले लेते हैं परंतु थोड़ी देर में चारों आपस में लड़ने लगते हैं कि मैं यह वाला रंग लूँगा और मैं यह वाला रंग लूंगा और लड़ते-लड़ते चारों shirt को फाड़ देते हैं और किसान जो अपनी पसंद से shirt लेकर आया था वह नाराज होकर बाहर चले जाता है और सोचने लगता है घर जाने से अच्छा तो बाहर ही है

उन चारों मूर्खों से दूर तो रहूंगा जब देखो चारों लड़ते रहते हैं और एक पेड़ के नीचे बैठा यह सोच रहा था कि इन चारों को लड़ने से कैसे रोका जाए और इन चारों को एक कैसे बनाया जाए तभी पेड़ पर से एक लकड़ी गिरती है  और वह उस लकड़ी की तरफ देखता है और कुछ सोचने लगता है तभी उसके दिमाग में ख्याल आता है क्यों ना इन चारों को एकता का पाठ पढ़ाया जाए और किसान लकड़िया लेकर घर जाता है और कहता है बच्चों इधर आओ आज तुम्हें मैं एकता का पाठ पढ़ाता हूं और इसके बाद मुझे नहीं लगता तुम कभी आपस में झगड़ा करोगे

चारों आते हैं किसान बोलता है चलो चारों  बैठ जाओ और चारों बैठ जाते हैं और किसान चारों के सामने एक एक लकड़ी रखता है और बोलता है चलो चारों इसे तोड़कर दिखाओ चारों बोलते हैं इसमें क्या बड़ी बात है हम तो इसे यूं ही तोड़ देंगे और चारों उस एक एक लकड़ी को तोड़ देते हैं
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उसके बाद किसान कहता है जब तक यह लकड़ी सिंगल थी तब तो तुमने तोड़ दी अगर मैं इन लकड़ियों को इकट्ठा कर दूं तो क्या तुम तोड़ पाओगे चारों कहने लगे हां हम तोड़ दूंगा किसान ने चारों को एक एक बार मौका दिया परंतु कोई भी उनमें से लकड़ियों को तोड़ नहीं पाया और इसके बाद किसान ने कहा जब तक तुम अलग अलग हो तुम इस लकड़ियों की तरह टूट जाओगे इसीलिए हर एक समस्या का सामना मिलकर करो मैं मानता हूं की एकता हर एक समस्या को तोड़ देती है

सीख एकता में ही बल है अगर किसी काम को करने के लिए हम एक साथ कोशिश नहीं करते हैं तब तक वह काम नहीं किया जा सकता है इसीलिए हमेशा  अपनों में एकता होनी चाहिए और इससे हम किसी भी समस्या का डटकर मुकाबला कर सकते हैं

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