Gyanvardhak और shikshaprad kahaniya

बहुत समय पहले की बात है  सोनापुर नाम का एक गांव हुआ करता था वहां के लोग अच्छे और सुशील थे लेकिन हर समय उनके मन में एक डर बना हुआ था लोग शाम होने से पहले ही सभी अपने घरों के अंदर चले जाते थे

उसके बाद कोई भी अपने घर के बाहर कदम भी नहीं रखते थे 1 दिन की बात है उस गांव में दो मुसाफिर आते हैं और वह यह बोलते हैं की वाह यह कितना सुंदर गांव है हर तरफ हरियाली ही हरियाली नजर आ रही है

यह तो है और उन्होंने कहा चलो किसी से यहां रात बिताने के लिए जगह पूछते हैं तभी वहां गुजरते हुए उन्हें एक बूढ़ा आदमी मिलता है उनसे  वह कहते हैं कि बाबा हमें एक मदद चाहिए हम मुसाफिर है और हम एक रात यहां रुकना चाहते हैं

क्या आप यहां रुकने के लिए कोई जगह बता सकते हैं तो वह बूढ़ा आदमी कहता है कि पास में एक ही मेरा मकान है तुम चाहो तो वहां रुक सकते हो और बूढ़े आदमी ने उनसे यह कहा कि मेहमान भगवान समान होते हैं

और यह बोलते हुए वह उन दोनों मुसाफिरों को अपने घर ले जाता है और उन दोनों की अच्छे से खातिरदारी करता है और सुबह होते ही वह दोनों मुसाफिर घूमने के लिए निकल जाते हैं उन दोनों को घूमते घूमते ही शाम हो जाती है शाम होते ही वह देखता है कि गांव के सभी लोग भाग भाग कर अपने घर की तरफ जा रहे थे

यह देखते ही एक मुसाफिर आश्चर्यचकित हो जाते हैं और अपने दूसरे मुसाफिर से कहता है यह सब क्या हो रहा है तो वह बोलता है चलो हम किसी से पूछते हैं वह दोनों लोगों को रोकने की बहुत कोशिश करते हैं लेकिन वह उन्हें रोकने में असफल रहते हैं उनके देखते ही देखते पूरे गांव मे सन्नाटा छा जाता है

वह दोनों मुसाफिर बूढ़े आदमी के घर चले जाते हैं वह बूढ़ा आदमी उनसे कहता है अच्छा हुआ तुम समय से पहले ही घर वापस आ गए वह कहता है मुझे तुम्हारी चिंता लगी हुई थी मुसाफिरों ने उनसे पूछा ऐसा क्यों बाबा ऐसा क्या हो गया है

shiksha prad kahaniya

बाहर भी हमने देखा था कि सभी लोग भागकर अपने घरों की तरफ जा रहे थे हमने उन्हें रोकने की बहुत कोशिश की लेकिन हम उन्हें रोक नहीं पाए फिर बाबा ने बताया कि यह सब उस अंगुलिमाल के डर के कारण है शाम होते वह अपनी गुफा से बाहर आ जाता है और उन्हें जो भी रास्ते में मिलता है

उन्हें वह जान से मार देता है और उनका सामान लूट लेता है और उनकी उंगलियां काट कर माला बना लेता है और गले में पहनता है इस डर के कारण ही गांव के सभी लोग शाम होते ही बिना देर किए हुए अपने घरों के अंदर चले जाते हैं बूढ़े आदमी की बात सुनकर पर दोनों मुसाफिर बहुत डर जाते हैं और यह कहने लगते हैं कि हम कहां फंस गए

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वह बेचारे अंगुलिमाल की डर से पूरी रात सो भी नहीं पाते हैं उन्हें उसका डर सताता रहता है और सुबह होते ही दोनों मुसाफिर गांव छोड़ कर चले जाते हैं ऐसे देखते ही देखते दिन बीतता जाता है लेकिन गांव में अंगुलिमाल का डर बना ही रहता है और उन्हें उसका डर हमेशा ही सताता रहता है

जिसके कारण सभी गांव वाले बहुत ही परेशान रहते थे 1 दिन गांव की कुछ लोग एक मंदिर के सामने इकट्ठा होते हैं और वह भगवान से यह विनती करते हैं कि हे भगवान हमें अंगुलिमाल से मुक्ति दिला दो कृपया करके हम पर दया करो भगवान कोई चमत्कार दिखाओ भगवान यह बोलते हुए गांव वाले उस मंदिर के अंदर खड़े रहते हैं

तभी उन्हें एक आवाज सुनाई देती है कोई है क्या हम कुछ समय के लिए यहां रुक सकते हैं यह सुनते ही गांव के सभी लोग मंदिर से बाहर आते हैं और वह महात्बुमा बुध को देखकर वह बहुत खुश हो जाते हैं और उनका स्वागत करते हैं उनकी सेवा में लग जाते हैं गांव के सभी लोग बुध की सेवा बहुत ही खुशी से करते हैं

लेकिन बुध उन लोगों खुशी के पीछे छुपे डर को जान जाते हैं और वह पूछने लगते हैं आप सभी इतने उदास और इतने डरे हुए क्यों हो जरूर कोई बात जो आप सभी लोगों को परेशान कर रही है इतने में सभी लोग बोलने लगते हैं की अंगुलिमाल के डर के कारण हम सभी लोग बहुत परेशान और भयभीत हैं

गौतम बुध बोलने लगते हैं की आप सभी लोग इतने डरे हुए हो की कोई अच्छे से बता नहीं पा रहा है कोई एक बताओ तभी एक आदमी खड़ा होकर सारी बात बुध को बताता है और बुद्ध यह कहने लगते हैं कि आप सभी बिल्कुल भी परेशान ना हो अब आपको इस डर से मुक्ति मिल जाएगी

सुबह होते ही गांव की सभी लोग अपने-अपने काम में व्यस्त हो जाते हैं और देखते ही देखते शाम ढलने लगता है तभी गौतम बुध जंगल की तरफ जाते हैं तभी अंगुलिमाल उन्हें देखता है बुद्ध उसे देखते हैं पर वह नजर अंदाज कर देते हैं आगे बढ़ जाते हैं तभी अंगुलिमाल उनके पीछे दौड़ने लगता है

और कहता  है की सन्यासी तुम कहां जा रहा है इस गांव का सबसे शक्तिशाली आदमी हूं मै और मेरी बात कोई भी नहीं टालता जो तुम्हारे पास है जल्दी से निकाल दो नहीं तो जान से हाथ धो बैठोगे तभी वह कहने लगते हैं कि तुम अगर गांव का सबसे शक्तिशाली आदमी है

तो इस पेड़ के कुछ पत्ते तोड़ कर लाओ वह कहने लगता है बस इतनी सी बात मैं अभी लाया और वह पत्ते तोड़कर लाता है बुध कहने लगते हैं जैसे तुम इन पत्तों को तोड़कर लाए हो फिर से इन्हीं वापस जोड़ दो अंगुलिमाल बुद्ध से कहने लगता है भला तोड़े हुए पत्ते को कोई कैसे जोड़ सकता है

महात्मा बुध कहने लगते हैं क्यों नहीं तुम तो सबसे शक्तिशाली हो फिर क्यों नहीं जोड़ सकते जिस तरह इस पेड़ के पत्ते को वापस नहीं लगा सकते हो उसी तरह तुम्हें किसी जान लेने या उन्हें मारने का कोई हक नहीं है यह सुनने के बाद अंगुलिमाल महात्मा बुद्ध से माफी मांगने लगता है और उनका सेवक बन जाता है और उस दिन के बाद से वह गांव के सभी लोगों की देखभाल करने लगता है

कहानी से शिक्षा

इस सत्य कहानी से हमें ये शिक्षा मिलती है की अगर आप अपने अच्छे कर्म करते रहते हो तो चाहे कोई बुरा आदमी आपका कुछ बिगड़ना चाहे नहीं बिगाड़ सकता क्योकि सच्चाई और धर्म के आगे हमेसा बुराई हार ही जाती है

इसलिए हमें अपनी ज़िन्दगी में कभी भी मुसीबतों से नहीं डरना चाहिए बल्कि हमें शांत मन और बुद्धिमानी से सामना करना चाहिए

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