Ped ki kahani

एक समय की बात है एक गांव से बाहर एक विशाल आम का वृक्ष था पेड़ के आसपास का वातावरण बहुत ही सुनहरा था और पेड़ पर तरह-तरह के पंछी रहते थे और यह पेड़ कई पंछियों के लिए जीवन था

एक दिन एक पतंग हवा के झोंके से उस पेड़ पर आ गई और उस पतंग का पीछा करते-करते एक छोटा बच्चा उस पेड़ के पास आ पहुंचा पतंग थोड़ा ऊपर होने के कारण वह बच्चा उस

पतंग तक नहीं पहुंच पा रहा था

वह बच्चा पतंग को पाने के लिए बार-बार उछल रहा था  परंतु उसे वह पतंग नहीं मिल पा रही थी तभी वह पेड़ उस बच्चे को देखकर बहुत खुश होता है और सोचता है चलो यह बच्चा तो बहुत मेहनत कर रहा है इसकी थोड़ी मदद कर दी जाए और पेड़ ने अपनी डाली और शाखा को नीचे झुका दिया

जिसकी वजह से वह पतंग नीचे आ गई और उस बच्चे ने वह पतंग को ले लिया और उस वृक्ष ने उस बच्चे को कुछ आम भी दे दिए जिससे वह बच्चा बहुत खुश हुआ और वह बच्चा हर रोज उस पेड़ के पास खेलने और उस पेड़ से बात करने आया करता था वह बच्चा उस पेड़ की डालियों पर झूला करता था और वहां पर फल खाया करता था

कुछ दिनों बाद बच्चा पेड़ के पास नहीं जा रहा था और फिर इसकी वजह से पेड़ थोड़ा मायूस था और वह सोच रहा था मेरा दोस्त अब मेरे पास खेलने क्यों नहीं आता और कुछ वर्ष हो जाते हैं और वह बच्चा उस पेड़ के पास खेलने नहीं जाता है और कुछ वर्षों के बाद वह बच्चा उस पेड़ के पास जाता है और पेड़ उसे देख कर बहुत खुश होता है और बोलता है तुम कहां रह गए थे

मैं तुम्हारा इतने वर्षों से इंतजार कर रहा था अब वह लड़का थोड़ा बड़ा हो चुका था और वह लड़का उसे कहता है अब मुझे तुम्हारे साथ नहीं खेलना है मुझे खेलने के लिए खिलौने चाहिए वृक्ष बच्चे से कहता है मेरे पास पैसे तो नहीं है परंतु मेरे पास यह फल है

तुम इस फल को लो और बाजार में जाकर इसे बेचकर अपने लिए खिलौने ले लो फिर पेड़ मुस्कुराता हुआ अपने सारे फल दे देता है और उस बच्चे की खुशी में अपनी खुशी ढूंढ लेता है फल लेने के बाद में बच्चा  चला जाता है

वह वृक्ष उस बच्चे का इंतजार करता रहता है और कई वर्ष बीत जाते हैं वह बच्चा नहीं आता है और वृक्ष उस बच्चे के इंतजार करता रहता है कि कब वह बच्चा आएगा और मेरे साथ बात करेगा खेलेगा और मैं उसके साथ खेल कर थोड़ा खुश रहूंगा और कई वर्षों बाद में बच्चा लौट कर उस पर के पास आता है

लेकिन अब एक आदमी बन चुका है जिसकी शादी हो चुकी है और जिसके बच्चे भी है वह पेड़ पास आता है और पेड़ बोलता है मैंने तुम्हें पहचान लिया तुम वही बच्चे हो मैं भी तुम्हारा इंतजार कई वर्षों से कर रहा हूं कि कब तुम आओ और मेरे साथ खेलो और बातचीत करो और अपने जीवन की कहानी बताओ

वह आदमी जो बच्चे से बड़ा हो चुका है वह कहता है मैं बहुत ही परेशान हूं और वह आदमी कहता है कि मुझे अपने बच्चे और बीवी के लिए घर बनाना है और उसके लिए मुझे पैसे चाहिए क्या तुम मुझे पैसे दे सकते हो पेड़ कहता है मेरे पास पैसे तो नहीं परंतु तुम मेरी यह शाखाएं काट कर ले जा सकते हो और इन शाखाओं से अपने लिए घर बना सकते हो पेड़ हंसता हंसता अपनी शाखाएं उस आदमी को दे देता है और वह आदमी शाखाएं को लेकर अपने और अपने बच्चों के लिए एक घर बना  लेता है

अब पेड़ के पास शाखाएं नहीं सिर्फ तना बचा हुआ है और अब फिर पेड़ अपने दोस्त का इंतजार करता रहता है और वह पेड़ सोचता रहता है कि कब मेरा दोस्त आएगा और मैं उसके साथ कुछ बात करूंगा और वह अपने जीवन की कुछ कहानिया बताएगा और कई वर्ष बीत जाते हैं

अब वह बच्चा एक बूढ़ा आदमी बन चुका है अब वह पेड़ के पास आता है और पेड़ के पास आकर बैठ जाता है पेड़ उसे देख कर बहुत खुश होता है और पेड़ उस बूढ़े आदमी से पूछता है और बताओ तुम्हारे परिवार वाले कैसे हैं सब कुछ सही सलामत है ना बूढ़ा आदमी पेड़ को जवाब देता है कि मुझे मेरे घर वालों ने घर से निकाल दिया है

अब मैं बहुत परेशान हूं और मुझे सभी देश की यात्राएं करने के लिए जाना है और मेरे पास कुछ पैसे भी नहीं है और फिर पेड़ उस बूढ़े आदमी से कहता है मेरे पास पैसे तो नहीं है परंतु मेरे पास मेरा तना है तुम इसे काट कर ले जाओ और इस तने की एक नाव बनाकर जल के द्वारा पूरी पृथ्वी का भ्रमण कर सकते हो

वह बुड्ढा आदमी कहता है हां मेरे दोस्त तुम सही कह रहे हो मैं तुम्हारे तने को काटकर इसके द्वारा नाव बनाकर पूरे पृथ्वी का भ्रमण कर सकता हूं और वह आदमी उस वृक्ष का तना भी काट लेता है और अब सिर्फ उस वृक्ष के पास जड़ ही बचा है और वह आदमी पेड़ के तने से नाव बनाकर देश भ्रमण पर निकल जाता है और पेड़ उसे खुश जाते देखता है और  खुश हो जाता है

अब वह पेड़ उस आदमी का इंतजार करना बंद कर देता है परंतु कई वर्षों बाद भी आदमी उस पेड़ के पास आता है वह पेड़ उस आदमी से कहता है माफ करना मेरे दोस्त अब मेरे पास तुम्हें देने के लिए कुछ भी नहीं है अब तो सिर्फ मेरे पास जड़ ही बची हुई है और वह पेड़ कहता है

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ना मेरे पास आम रहे ना मेरे पास वह शाखा है और ना  मेरे पास वह तने रहे और वह बुड्ढा आदमी कहता है नहीं मेरे दोस्त इस बार तुमसे कुछ मांगने नहीं आया हूं और बुड्ढा आदमी कहता है कि मैं यहां पर आराम करने आया हूं और वृक्ष कहता है हां आराम करने के लिए मेरे जड़ बहुत अच्छी जगह है तुम यहां पर आराम कर सकते हो और दोनों ही अपने जीवन के कुछ दृश्य याद कर हंसते हैं और सोचते हैं काश वह पल दोबारा आ जाए और दोनों की आंखों में आंसू ही आंसू भर जाते हैं

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