Nani maa ki kahani

Nani maa ki kahani – दो दोस्तों की कहानी

एक समय की बात है पीतमपुरा गांव में दो लड़के रहा करते थे विनय और कुनाल दोनों बहुत अच्छे दोस्त थे और दोनों बहुत मेहनती थे लेकिन कुनाल हमेशा shotcut से पैसा कमाना चाहता था nani ki kahani जबकि कुनाल जूते बनाने मे माहिर था वह किसी भी प्रकार के जूते बना सकता था और दूसरी तरफ विनय तरह तरह के कपड़े बनाने में माहिर था वह किसी भी प्रकार का कपड़ा बना लिया करता था और विनय बहुत ही ज्यादा समझदार था

वह कुनाल को हमेशा समझाता रहता तु इतने अच्छे जूते बनाना जानता है फिर भी शॉर्टकट के पीछे भागता रहता है और फिर कुनाल विनय से कहता है अरे यार विनय जूते बनाकर कोई आदमी कितने पैसे कमा लेगा और कब तक मैं दूसरों के जूते बनाता रहूंगा  हमें कोई ऐसा काम करना पड़ेगा जिससे कि हम जल्दी अमीर बन जाए

फिर विनय कहता है मेरे दोस्त कामयाबी कभी शॉर्टकट से नहीं मिलती है उसके लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ती है और सही समय का इंतजार करना पड़ता है तब जाकर सफलता मिलती है इतना सुनते ही कुनाल कहता है इतने दिनों से हम मेहनत ही तो कर रहे हैं

विनय जवाब देता है यार तुझे समझाना भी  भैंस के आगे बीन बजाना है चल घर चलते हैं रात होने को है और दोनों घर की ओर निकल गए दोनों दोस्गांत गाव के लोगों के लिए काम करके ही  थोड़ा बहुत आमदनी कमा लेते थे और उसी में उनका गुजारा होता था हर शाम को वे दोनों अक्सर मिला करते थे और दिन भर के बारे में बात किया करते थे

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1 दिन वह दोनों नदी के किनारे घूम रहे थे तभी उन दोनों को एक आवाज सुनाई दी बचाओ बचाओ और वे दोनों आवाज की ओर भागने लगे और नदी के पास जाकर देखते हैं की एक साधु नदी में डूब रहा होता है साधु बाबा को डूबता देख विनय ने पास पड़ा हुआ एक पेड़ टहनी , साधु बाबा की तरफ फेका और साधु बाबा ने उसे जब पकड़ा तो कुनाल और विनय ने साधु बाबा को बाहर खींच लिया

साधु बाबा बहुत बड़े ज्ञानी थे इसलिए उन दोनों की शक्ल देखते ही उन दोनों के बारे में सब कुछ जान जाते है और उनसे कहते हैं मेरी जान बचाने के लिए धन्यवाद और उन दोनों से बोले मैं तुम दोनों से बहुत ही प्रसन्न हूं और मैं तुम्हें एक उपहार देना चाहता हूं इस नदी के उस पार दो गांव छोड़कर एक जंगल है और उस जंगल में एक सुनहरी परी रहती है और वह सुनहरी परी सभी की मनोकामनाएं पूरी करती है

तभी विनय बाबा से पूछता है बाबा वह हमारी मनोकामना को पूरी करेगी तो साधु बाबा कहते हैं कि तुम दोनों नेक दिल इंसान हो और सुनहरी परी अच्छे लोगों की सहायता करती है इसलिए मैं चाहता हूं कि तुम दोनों उस जंगल में जाओ और सुनहरी परी से मिलो वह तुम्हारी मनोकामना जरूर पूरी करेगी

यह कहकर साधु बाबा वहां से चले जाते हैं साधु की बात सुनकर कुनाल विनय से कहता है विनय क्या तुमने साधु बाबा की बात सुनी विनय कहता है हां मैंने सब कुछ सुना और कुनाल विनय से कहता है चल जल्दी जंगल की ओर चलते हैं और सुनहरी परी से मिलते हैं तभी विनय कहता है तुम दोबारा शॉर्टकट के पीछे भाग रहे हो और कुनाल विनय से चलने की जिद करता है

और दोनों जंगल की ओर निकल जाते हैं गांव को  पार करते समय दोनों एक तालाब के किनारे पहुंच जाते हैं दोनों तालाब के किनारे पैर धोने के लिए जूते निकालते हैं और जूते नदियों के लहरों के द्वारा नदी में बह जाते हैं और तभी कुनाल कहता है कोई बात नहीं है मेरा हुनर किस काम आएगा और दोनों एक पेड़ के नीचे बैठ जाते हैं

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कुनाल हमेशा अपने पास सुई धागा रखता था इसीलिए कुनाल अपने लिए और विनय के लिए पेड़ की छाल से नए जूते बना देता है और फिर दोनों एक गांव की तरफ जा ही रहे होते हैं कि तभी उन्हें एक आदमी दिखता है और वह आदमी जब उन दोनों के जूते देखता है और कहता है यह जूते कहां से लिए कुनाल कहता है यह तो मैंने बनाया है तभी आदमी कुनाल से कहता है मेरे लिए भी एक जूते बना दो मैं तुम्हें इस जूते के अच्छे खासे पैसे दे दूंगा

थोड़ी ही देर में कुनाल उस आदमी के लिए जूते बना देता है और वह आदमी कुनाल को जूते के बदले पैसे दे देता है और थोड़ी ही देर बाद वह दोनों एक गांव को पार कर लेते हैं और वह दूसरे गांव की तरफ निकल जाते हैं और जैसे जैसे दूसरे गांव की तरफ बढ़ रहे थे ठंड भी बढ़ती जा रही थी

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कुनाल विनय से कहता है विनय ठंड तो बढ़ती जा रही है अब क्या करें विनय कहता है मेरा हुनर किस काम आएगा थोड़ी देर रुक जाओ मैं अभी जैकेट बना देता हूं थोड़ी देर बाद विनय पेड़ के पत्तों से अच्छी खासी जैकेट बना देता है और जब कुनाल उस जैकेट को पहनता है तो कहता है कि यह जैकेट तो बहुत ही अच्छे हैं और बहुत ही गरम है और जैकेट पहनने के बाद दोनों जंगल की तरफ निकल जाते हैं और जंगल की तरफ जाते समय उन्हें एक आदमी दिखाई देता है जो ठंड के मारे कराह रहा था और जब वह आदमी कुनाल और विनय को देखता है तो कहता है कि तुम दोनों ने जैकेट कहां से लिया तो विनय कहता है

यह जैकेट तो मैंने बनाया है तो फिर वह आदमी भी कहता है मेरे लिए भी एक जैकेट बना दो चाहे इसके बदले कितने भी पैसे ले लो थोड़ी देर में विनय उस आदमी के लिए जैकेट बना देता  है और वह आदमी जैकेट के बदले विनय को पैसे दे देता है

और दोनों जंगल में आगे बढ़ने लगते हैं थोड़ा दूर चलकर वह दोनों बहुत थक जाते हैं तभी विनय कुनाल से कहता है  कुनाल मुझे किसी सुनहरी परी को नहीं ढूंढना है इतना दूर आने पर भी हमें कुछ नहीं मिला ना जाने वह परी है भी या नहीं और अब हमें घर चलना चाहिए भाई और फिर कुनाल कहता है हां मुझे भी लगता है कि हम दोनों बहुत दूर आ गए हैं और मुझे लगता है कि वह साधु बाबा हमसे मजाक कर रहे थे और फिर क्या था दोनों अपने गांव की तरफ चलने लगते हैं कि तभी उन्हें रास्ते में कुछ आदमी मिलते है वह विनय से कहता है

की बहुत अच्छा हुआ कि आप मुझे मिल गए मैं आपको ही तो ढूंढ रहा था यह मेरे गांव के लोग हैं जो आप से जैकेट बनवाना चाहते हैं विनय गांव वालों से कहता है मुझे थोड़ा समय दे दो मैं तुम सब के लिए जैकेट बना दूंगा और थोड़ी देर बाद विनय सबके लिए जैकेट बना देता है और उसके बदले वह लोग विनय को खूब सारा पैसा देते हैं

और पैसे लेकर विनय बहुत खुश हो जाता है और थोड़ी दूर जाकर उन्हें वह आदमी मिलता है जिसके लिए कुनाल ने जूते बनाए थे और वह आदमी उन दोनों के पास आकर कहता है आप ही लोगों को खोज रहा था और वह आदमी कहता है कि मेरे गांव वालों लोगों के लिए ऐसे ही जूते बना दो इसके लिए वे तुम्हें पैसे दे देंगे

कुनाल यह सुनकर बहुत खुश होता है और सभी के लिए जूता बनाना शुरू कर देता है और कुछ ही देर में वह सब के लिए जूते बना देता है और उसके बदले वह लोग कुनाल को खूब सारा पैसा देते हैं और पैसा लेते ही कुनाल बहुत खुश हो जाता है और फिर वे दोनों अपने गांव की तरफ चल देते हैं और विनय  कुनाल से कहता है अरे कुनाल क्या तुम्हें कुछ समझ आया यहां कोई सुनहरी परी नहीं है भाई और बाबा हमें यही तो समझाना चाह रहे थे

और कुनाल कहता है हां मुझे भी लगता है तू सही कह रहा है और अब मुझे साधु बाबा की बात याद आ गई कि वह हमें गांव से बाहर भेजकर हमें हमारे हुनर के बारे में हमें बताना चाहते थे और दोनों सोचते हैं कि इन पैसों से हम गांव में दुकान खोलेंगे जहां हम जूते और कपड़े दोनों बेचेंगे और थोड़े ही  दिनों में उन दोनों ने अपनी दुकान खोल ली और धीरे धीरे लोग उनके दुकानों पर आने लगे

दोनो ने अपने हुनर का इस्तमाल करके अलग अलग डिजाईन से बनाया जो गाव वालो को बहुत ही पसंद आया शुरू में दोनों ने मिलकर बहुत ही मेहनत की और कुछ समय में वह उस गांव के सबसे अमीर आदमी बन गए

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Nani ki kahani सिख  –  हम कभी भी वही काम करना चाहिय जो हमें करना अच्छा लगता है क्योकि तभी हम उस काम में महारत हासिल कर पाएंगे और काफी लम्बे समय तक उस काम को कर पायेगे

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