Mastram ki hindi kahani

मस्तराम की हिंदी कहानी (story) बहुत समय पहले की बात है एक मस्तराम (Mastram) नाम का व्यक्ति अपने परिवार के साथ रामपुर गांव में रहता था  यह गांव बहुत ही ज्यादा खुशहाल (Happy) गांव था क्योंकि यहां के सभी लोग खेती करके अपने जीवन का भरण पोषण कर लेते थे

 मस्तराम गांव में सबसे अलग किस्म (Unique) का इंसान था और सभी लोग इसे इसकी कामचोरी (lazy) और इधर उधर की बातें करने के लिए जानते थे मस्तराम हमेशा ही खुश रहने वाला इंसान था यह कभी भी किसी भी चीजों की चिंता (Worry) नहीं करता था

 

इसका हर रोज (every day) एक ही काम था सुबह उठना और घर से खाना खाकर बाहर निकलना उसके बाद पूरे गांव में इधर से उधर लोगों के साथ बातें करना इधर के बातों को उधर करना और इस तरह से इसका पूरा दिन कट (Spend) जाता था और शाम के समय यह पैसे वसूलने जाता था

 दरअसल मस्तराम के पास दो व्यवसाय (Business) थे  एक खेती का व्यवसाय था और दूसरा भैंस का दूध बेचने (selling milk) का व्यापार था पर मस्तराम को इनसे कुछ भी नहीं लेना देना था वह सिर्फ हर रोज शाम को पैसे वसूलने (Money collection) चले जाया करता था

 

 उसने अपना यह सारा व्यवसाय अपने नौकरों के भरोसे छोड़ रखा था जो पूरा दिन के लिए काम करते थे और मस्तराम कभी भी किसी भी तरह की कोई जांच (Investigation) भी नहीं करता था कि किस सामान को कितने में खरीदा(Buy) गया है या फिर कितने में बेचा (Sell) गया है

 इस तरह से कई महीने मस्तराम का व्यवसाय चलता रहा पर कुछ दिनों बाद दूध के business में मंदी आने लग गयी क्योंकि मस्तराम अपनी भैस का ख्याल (Care) नहीं रखता था और उसके नौकर ठीक से काम नहीं कर रहे थे जिसकी वजह से उसके भैंस बीमार (Ill) पड़ गए और उनकी मृत्यु हो गई

Jadui angoothi

 अब मस्तराम का एक व्यवसाय पूरी तरह से बंद हो चुका था और वह सिर्फ खेती के भरोसे ही था एक व्यवसाय पूरी तरह से बंद(close) हो जाने के बाद भी मस्तराम को कोई भी फिक्र नहीं थी उसके पिताजी और धर्मपत्नी के कई बार कहने पर भी वह नहीं सुधरा और उसने अपने व्यवसाय को गंभीरता (serious) से नहीं लिया

 हर रोज की तरह है दिनभर गांव में इधर से उधर भटकता था और शाम को खेती का हिसाब करने पहुंच जाता था 

धान की खेती लगाई जा रही थी और उसके नौकरों (servant) ने धान की खेती बड़े ही अच्छे से लगाई थी तो इस बार मस्तराम सोच रहा था कि  धान से उसको कुछ अच्छा मुनाफा (Profit) होगा कुछ महीने बाद जब धान की खेती पूरी तरह से तैयार (ready) हो चुकी थी और धान की खेती उसके नौकर काट रहे थे तब उस समय शाम को जब मस्तराम पैसों की वसूली (collection) करने जाता है

 तो वह देखता है कि उसके नौकर धान को काटकर बेच कर रफू चक्कर (run away) हो चुके हैं वह यह देखकर हैरान हो जाता है और इस तरह से वह अपनी पूरी फसल को खो (lose) देता है

 

 और उसकी बुद्धि (Mind) खुल जाती हैं और उसे समझ आ जाता है कि अपना काम हमेशा  खुद ही करना चाहिए किसी तरह से मस्तराम अपने घर के पैसों की कमी को संभालता है और फिर से दोबारा मेहनत करके अपने दोनों व्यवसाय को खड़ा करता है

 और इस बार वह दुबारा नौकरों को रखता है पर वह नौकरों के साथ दिनभर खेतों में और अपनी भैंस का ख्याल रखता है

 इस तरह में इस कहानी से शिक्षा (moral) मिलती है कि हमें कभी भी अपना काम खुद ही करना चाहिए और अगर हम अपना काम किसी और के द्वारा कराते हैं तो हमें उसके उपर पूरी तरह से नज़र (Keep eyes) रखनी चाहिए क्योंकि कोई दूसरा व्यक्ति हमारे काम को अच्छे से तभी कर सकता है जब उस व्यक्ति पर पूरी तरह से निगरानी रखी जाए

और यदि ऐसा हो सके कि हम अपने काम को खुद ही कर पाए तो हमें जरूर करना चाहिए  क्योंकि अपने काम को हम से अच्छा कोई और कर ही नहीं सकता और हमें हमेशा school में यह सिखाया जाता है कि हमें हमेशा अपना काम (work) स्वयं करना चाहिए

 तो कुछ इस तरह से मस्तराम के साथ कुछ लोगों ने धोखा दिया इसी तरह आज के समय में बहुत से ऐसे लोग हैं जो आपकी लापरवाही का इंतजार कर रहे होते हैं और आप को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करते हैं

 इसलिए कभी भी आप अपनी जिंदगी (life) में किसी भी कार्य को लापरवाही के साथ ना करें और अपने द्वारा किया गया हर किसी काम पर 100% (percent) दें ताकि बाद में कभी भी आपको अफसोस ना हो

 

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