kauwa ki kahani

एक समय की बात है  (kauwa ki kahani) एक राज्य मे राजा का बहुत ही खूबसूरत महल था और उसी खूबसूरत महल के से थोड़ी दूर में एक बहुत ही बड़ा पेड़ था

उसी पेड़ पर दो कौवे रहा करते थे दोनों  ही पति और पत्नी थे और वह दोनों बड़े ही आराम से रहा करते थे और पेड़ से थोड़ी ही दूर एक बिल में एक अजगर सांप रहा करता था और यह बात दोनों कौवे को पता थी की यहां से थोड़ी दूरी पर एक अजगर रहा करता है

इसके बावजूद भी  वह दोनों कौवे वहां पर रहा करते थे और दिन में वे दोनों खाने की तलाश में बाहर निकल जाया करते थे ऐसे ही बहुत दिनों तक चलता रहा रात में वह घर पर आ जाते और दिन में खाने की तलाश में निकल जाते

एक दिन मादा कौवे ने दो अंडे दिए और वे दोनों खाने की तलाश में बाहर निकल गए और जब अपने घोसले में आए तो उन्होंने वहां पर अपने अंडे को नहीं पाया और वह दोनों बहुत ही बुरी तरीके से रोने लगे और वे सोचने लगे कि हमारे अंडे गए तो गए कहां और उन्हें लगा शायद अजगर ने ही खाया होगा

परंतु कुछ दिनों बाद दोनों  इस बात को भूल गए और सामान्य जीवन जीने लगे और कुछ दिनों बाद मादा कौवे ने फिर से दो अंडे दिए और हमेशा कि तरह अगले दिन दोनों ही खाने की तलाश में बाहर निकल गए

kauwa ki kahani
kauwa ki kahani

परंतु जब वह वापस आए तो उन्होंने अपने अंडे को वहां से गायब देखा तो दोनों ही बड़े परेशान हो गए और कहने लगे फिर से हमारे अंडे गायब हो गए ऐसा कैसे हो सकता है

मादा कौवा कहने लगी मुझे तो लगता है कि मेरे अंडे को तो उसी अजगर ने खा लिया होगा तो नर कौवा कहता है चिंता मत करो मैं उस अजगर को नहीं छोडूंगा मैं उससे बदला जरूर लूंगा

एक दिन महारानी नदी किनारे नहाने को जाती है और वह अपने सारे आभूषण को निकाल कर बाहर रख देती है और कौवा सब कुछ देख रहा होता है कौवा मौका पाते ही उनमें से एक जेवर लेकर उड़ जाता है और सिपाही चिल्लाने लगते हैं और उसके पीछे भागने लगते हैं

वह कौवे को भागते हुए देख उसके पीछे भागते भागते जाते हैं और कौवा उस जेवर को सांप के बिल में डाल देता है और  सिपाही यह सब देख लेते हैं और जैसे ही सिपाही जेवर को निकालने के लिए हाथ बिल में डालते हैं

उनके हाथ में जेवर तो नहीं आता बल्कि सांप आ जाता है और डर के मारे दोनों सिपाही सांप को मार देते हैं और जेवर को निकाल लेते हैं और कुछ दिनों बाद दोनों  कौवे खुशी खुशी से रहने लगते हैं और कुछ दिनों बाद मादा कौवा फिर से अंडा देती है और इस बार कोई भी अंडा गायब नहीं होता

सीख- अगर आप ताकतवर नहीं हो  तो इसका मतलब यह नहीं कि हम जीत ही नहीं सकते हैं बुद्धि बलवान को हरा सकती है

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आलसी कौवे की कहानी (kala kauwa ki kahani)

एक जंगल में एक गिलहरी और कौवा रहते थे गिलहरी एक दिन कौवे से बोलता है चलो हम दोनों मिलकर खेती करते है कौवा कहता है ठीक है अगले दिन गिलहरी आवाज लगाता है अरे भाई चलो खेती करने चलते हैं

kauwa ki kahani
kauwa ki kahani

कौवा कहता है चलो मैं आता हूं चुपड़ी रोटी खाता हूं ठंडा पानी पीता हूं हरी डाल पर बैठा हूं गिलहरी यह सुनकर अकेले ही खेती करने चला जाता है अगले दिन गिलहरी फिर आवाज लगाता है तो कौवा वही बात दोहराने लगता है फिर गिलहरी अकेला ही चला जाता है

देखते ही देखते फसल पक जाती है कटाई का दिन आ जाता है तो गिलहरी फिर कौवा से कहता है अरे कावा भाई चलो फसल पक गई है काटने चलते हैं फिर से वही बात कहने लगता है चुपड़ी रोटी खाता हूं ठंडा पानी पीता हूं हरी डाल पर बैठा हूं

गिलहरी फिर अकेला ही फसल काटने चला जाता है और फसल काट कर दो हिस्से करके अपना एक हिस्सा लेकर चला आता है रास्ते में आते समय कौवा को यह कहते जाता है की अरे गौरव भाई तुम्हारा हिस्सा पेड़ के नीचे रखा हुआ है तुम जाकर ले आना कौवा फिर से वही बात करता है

अगले दिन बड़ी तेज से आंधी और पानी बरसता है जिससे कौवे का सारा फसल बर्बाद हो जाता है कुछ तो आंधी में उड़ जाता है और कुछ पानी में बह जाता है और वह पेड़ भी जड़ से उखड़ जाता है जिस पर कौवा रहता था

इस प्रकार अलसी कौवे का अंत हो जाता है अगर वह गिलहरी की बात मानता तो वह जिंदा होता और उसकी फसल  बर्बाद होने से बच जाती उसने गिलहरी की बात न मान कर बहुत बड़ी गलती की थी

इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि समय किसी के लिए भी नहीं रुकता है समय तो बस चलता ही रहता है

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