Mahakavi kalidas ki kahani

कालिदास जब वह युवा थे (kalidas ki kahani) तो वह भी दुसरे लोगो की तरह अपना गुजर-बसर करते थे उनके द्वारा किये गए हरकत से सभी लोग हंसे बिना नहीं रह पाते थे और उनकी मूर्खता का भी मजाक उड़ाते थे कालिदास जिस राज्य में रहते थे

उस राज्य के राजा की एक पुत्री थी जिसका नाम विद्युतमां था वह अपने नाम के अनुकूल बहुत सुंदर और बहुत ही विद्वान थी इसके अलावा बहुत घमंडी भी थी उसकी सुंदरता के कारण कई राजकुमारों और राजाओं ने उससे शादी करना चाहा पर वह इस बात पर अटल थी कि वह उस व्यक्ति से शादी करेगी जो उसे वाद विवादों में हरा देगा और वह खुद विजई हो जाएगा पर उसके सामने कोई भी राजकुमार या राजा टिक नहीं पाए वह सभी को अपने बातों से हरा देती थी

और उन बेचारो को वापस जाना पड़ता था  वह हार कर मुंह लटकाए चले जाते थे वह सभी कुछ कर भी नहीं सकते थे इस बात से ज्यादा दुखी होते थे कि वह एक स्त्री से हार मानकर चले जाते थे जब विद्वानो राजकुमारी से जीत न पाए तो उससे बदला लेने की एक योजना बनाई

उन्होंने यह योजना बनाई थी कि उसका विवाह एक ऐसे मूर्ख व्यक्ति से करवा देंगे जिससे वह पूरी जिंदगी पछताते रहे और वह सारे विद्वान और राजकुमार उस मूर्ख व्यक्ति की तलाश में निकल पड़े थे पर उन्हें ऐसा कोई व्यक्ति नहीं मिल रहा था सब लोग निराश ही हो चुके थे

तभी एक विद्वान की नजर कालिदास के रूप में उस मूर्ख व्यक्ति पर पड़ती है जोकि जिस डाल पर बैठा होता है उसी को कुल्हाड़ी से काट रहा होता है सभी विद्वान हंसे बिना नहीं रह पाते हैं और यह कहते हैं की इससे मूर्ख व्यक्ति हमें कहां मिलेगा जो जिस डाल पर बैठा है उसी को कुल्हाड़ी से काट रहा है यह निश्चित है की डाल के साथ-साथ वह भी नीचे गिर जाएगा पर उसे इस बारे में जरा सा भी ज्ञान नहीं है

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विद्वान बड़े प्यार से उसे नीचे बुलाते हैं और यह कहते हैं कि अगर तुम हमारी बात मानोगे तो हम तुम्हारी शादी एक सुंदर राजकुमारी से करवा देंगे पहले तो कालिदास मना कर देते हैं फिर उनके बहुत मनाने पर वह मान जाते हैं और हां कह देते हैं
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सभी विद्वान कालिदास को अच्छे अच्छे कपडे पहना देता है और उन्हें यह अच्छी तरह से समझा देते है की अगर आपसे राजकुमारी द्वारा कुछ भी पूछा जाता है तो तुम अपना मुह नहीं खोलोगे तुम्हे सब कुछ इशारे से कहना है इतना कहने के बाद विद्वानों ने कालिदास को महल में ले आये और राजकुमारी के पास ये सन्देश भेजवा दिया गया की हमारे गुरु आप शास्त्रार्थ करने की लिए तैयार है लेकिन अभी उन्होंने मौन व्रत रख रखा है इसलिय वह कुछ भी नहीं बोलोगे

अगर आप कुछ भी जानना चाहती है तो आप इशारो से पूछ सकती है राजकुमारी मान जाती है और थोडा सोचने के बाद हँ कर देती है

राजकुमारी और कालिदास के बिच शास्त्रार्थ शुरू होता है पहले विद्युतमा अपने हाथ की एक ऊँगली खड़ा करती है जिसका मतलब था ब्रम्हा एक है पर कालिदास इसका मतलब तो समझ ही नहीं सकते थे उन्हें कुछ और ही समझ आता है और वह यह समझते है की यह मेरी एक आख फोड़ना चाहती है

इस बात से कालिदास को बहुत गुस्सा आ जाता है और फिर क्या वो अपनी दो उंगलियों को उठा लेते है जिससे वह ये बताना चाहते है की अगर तुम मेरी एक आँख फोड़ोगी तो मै तुम्हारी दोनों आखो को फोड़ डालूँगा

पर वहा उपस्थित विद्वान् इसका मतलब राजकुमारी को यह बताते है की हमारे गुरु यह बताना चाहते है की संसार में ब्रम्हा जी और जीव दोनों ही पूरी तरह से सच है

राजकुमारी सभी विद्वानों की बात मान लेती है और अपना दूसरा सवाल कालिदास से पूछती है और इसके लिए राजकुमारी अपने पांचों उंगलियों को उठाती है और इसका मतलब है की संसार पांच तत्वों से मिलकर बना है परंतु कालिदास इसका मतलब समझते हैं कि की राजकुमारी मुझे थप्पड़ मारना चाहती है

 इसलिए वह रानी को अपना मुक्का दिखाते हैं और कालिदास के अनुसार इसका मतलब था कि अगर राजकुमारी मुझे थप्पड़ मारेगी तो मैं उन्हें मुक्का मारूंगा  परंतु वहां पर बैठे विद्वानों ने इसका अर्थ किसी और तरीके से बताया उन्होंने कहा कालिदास कहना चाहते हैं कि संसार पांच तत्वों से मिलकर बना है और हमारे गुरु कालिदास हमें इस मुक्के के इशारे से बताना चाहते हैं जब तक यह पांचों तत्व अलग-अलग रहेंगे तब तक इनसे कुछ भी सिद्ध नहीं हो सकता है और पांचो तत्व को मिलाकर ही संसार का निर्माण संभव है

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Mahakavi kalidas ki kahani

यह सुनने के बाद विद्युतमा अपनी हार मान लेती है और कालिदास से विवाह कर लेती है और कुछ दिन तो कालिदास ठीक से रहते हैं परंतु एक दिन जब एक ऊंट उनके सामने से जा रहा था तो कालिदास जोर जोर से चिल्लाने लगते हैं और कालिदास को जोर जोर चिल्लाते देख विद्युतमा यह समझ जाती है कि उनका विवाह किसी बुद्धिमान इंसान से नहीं बल्कि एक मूर्ख व्यक्ति से हुआ है

विद्युतमा को कालिदास की सच्चाई का पता चल चुका था फिर क्या विद्युतमा ने कालिदास को बहुत बुरा भला कहा और उनकी बहुत  बेइज्जती करते हुए उन्हें घर से बाहर निकाल दिया कालिदास मूर्ख थे परंतु वह यह बेइज्जती बर्दाश्त नहीं कर पाए और विद्या प्राप्ति के लिए निकल पड़े उन्होंने विद्या प्राप्ति के लिए बहुत परिश्रम किया परंतु उन्हें इसका कोई परिणाम नहीं मिला और इससे वह बेचैन हो गए

और अपने प्राण त्यागने के विचार से वह देवी मां के मंदिर में गए और तलवार लेकर जैसे ही कालिदास अपना सिर काटने वाले थे तभी मंदिर प्रकाश से भर गया और देवी मां ने शीघ्र आकर कालिदास को दर्शन दिया और देवी मां की अपार कृपया उन पर बरस पड़ी और उनके द्वारा की गई घोर परिश्रम रंग लाई 

उनकी बुद्धिमता के चर्चे गांव गांव में होने लगे और वह इसी प्रकार एक मूर्ख इंसान से महान कालिदास बन गए और कालिदास जब अपने घर गए तो उनकी पत्नी ने उन्हें तहे दिल से स्वीकार किया और अब कालिदास बहुत ही विद्वान बन चुके थे और उनके चर्चे पूरे देश में सुनाई दे रहे थे
Kalidas wiki

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