Jadui chakki ki kahani

एक समय की बात है jadui chakki की मिर्ज़ापुर नाम के गांव में दो भाई रहते थे हरिलाल और राम लाल वे दोनों भाई बचपन से आपस में झगड़ते रहते थे इसलिए बड़े होने के बाद दोनों भाई अलग हो गए हरिलाल बहुत ही अमीर था और वह अपना जीवन बड़ी आराम से जी रहा था

उसके विपरीत रामलाल बहुत ही गरीब था और उसके पास कोई नौकरी भी नहीं थी और वह जंगल से कुछ लकड़ी काटकर बाजार में बेचकर अपना जीवन यापन किसी तरह से कर रहा था और कभी-कभी तो ऐसा भी होता था जब उसके परिवार के पास खाने को भी कुछ नहीं होता था

वही हरी लाल का परिवार सभी त्यौहारों को बड़े धूमधाम से मनाया करता है परंतु रामलाल बहुत ही अच्छे स्वभाव का आदमी है जो सभी लोगों की मदद करता है

एक दिन की बात है जब रामलाल के घर में कुछ भी खाने को नहीं था और उसके बच्चे और उसकी पत्नी सभी भूखे थे और रामलाल से अपने परिवार की ये हालत देखी नहीं जा रही थी इसीलिए रामलाल ने इस बार अपने भाई से मदद मांगने गया और अपने भाई हरिलाल से मिला

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रामलाल से कहने लगा और बताओ किस काम से आए हो रामलाल कहने लगा मुझे कुछ पैसे उधार मिलेंगे जल्द ही मैं तुम्हें तुम्हारे पैसा दे दूंगा हरिलाल इतना सुनते ही कहने लगा मुझे पता था तुम कुछ मांगने ही आए होंगे और हरिलाल ने बिना कुछ दिए ही उसे वहां से जाने को कह दिया

रामलाल अपने भाई की कही गई बातों को सहन नहीं कर पाया और वहां से निकल गया और वह अपने घर की तरफ जा ही रहा था कि वह देखता है एक बूढ़ा आदमी लकड़ियों का भारी बंडल उठा रहा है रामलाल से यह देखा नहीं गया

वह उसकी मदद के लिए चला गया वहां जाते ही वह उस बूढ़े आदमी से कहने लगा काका रुको मैं यह उठाकर आपके घर तक पहुंचा दूं और उस बूढ़े आदमी ने उसकी बात मान ली और बूढ़े आदमी की घर की तरफ निकल गए रामलाल ने लकड़ी का बंडल बूढ़े आदमी के घर तक पहुंचा दिया

पर बुढा आदमी रामलाल की शक्ल देखते ही समझ गया कि यह बहुत संकट में है वह बुढा आदमी रामलाल से पूछता है क्या हुआ तुम इतने परेशान क्यों हो और रामलाल अपना दुख छुपा नहीं सका रामलाल ने उस आदमी को यह सब कुछ बता दिया कि मेरे घर में कुछ खाने को नहीं है और मेरे बच्चे और पत्नी सभी भूखे हैं और उस बूढ़े आदमी ने कहा रुको मैं अभी आता हूं

बूढ़ा आदमी घर में गया और मीठी रोटी लेकर आया और रामलाल से कहने लगा मेरी बातों को ध्यान से सुनना और रामलाल उस बूढ़े आदमी की बातों को बिल्कुल ध्यान से सुनने लगा उस बूढ़े आदमी ने कहा गांव से बाहर एक जंगल है और जंगल से थोड़ा आगे जाने पर तुम्हें आम के तीन पेड़ मिलेंगे और आम के तीन पेड़ पार करने के बाद तुम्हें एक छोटा सा पहाड़ मिलेगा और उस छोटे से पहाड़ पर एक झोपड़ी बनी होगी

जिसमें तीन बोने रहते हैं तुम्हें यह मीठी रोटी उन तीनों को देनी है और उन तीनों से चक्की मांगनी है रामलाल ने यह सब बातें बिल्कुल ध्यान सुनी और बूढ़े आदमी का धन्यवाद करते हुए वह जंगल की ओर निकल गया
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जंगल पार करने के बाद उसे आम के तीन पेड़ मिले आम के पेड़ पर आम पक चुके थे और रामलाल उन्हें देखकर मन ही मन में सोचने लगा यह फल कितने मीठे होंगे परंतु वह आगे बढ़ता रहा और आम के तीनों पेड़ से आगे जाने के बाद उसे एक पहाड़ दिखा जिस पर सच में एक झोपड़ी थी

इसे देखकर वह बहुत उत्साहित हो गया और झोपड़ी की ओर फुर्ती से बढ़ने लगा और जल्द ही रामलाल झोपड़ी के पास पहुंच गया और झोपड़ी के अंदर जाते ही पर देखता है कि सच में तीन बोने एक साथ बैठे हुए हैं रामलाल उन्हें देखकर बहुत ही खुश हुआ क्योंकि उसने इससे पहले कभी बोने नहीं देखे थे और कुछ देर के लिए है खो गया परंतु बोने उसे देख कर इतना खुश नहीं थे

jadui chakki jadui chakki

रामलाल से कहने लगे तुम कौन हो और यहां पर क्या कर रहे हो रामलाल कहने लगा मैं रामलाल हूं बोने ने कहा हम किसी रामलाल को नहीं जानते हैं और तुम यहां से चले जाओ परंतु रामलाल ने जब यह कहा कि मैं यहां मीठी रोटी बेचने आया हूं तो बोने बहुत खुश हो गए क्योंकि उन्हें मीठी रोटी बहुत ही पसंद है

रामलाल ने बोला मुझे इसके बदले में चक्की चाहिए बोने ने कहा ठीक है और बोने ने रामलाल से मीठी रोटी ले ली और रामलाल को चक्की दे दी और कहा यह कोई साधारण चक्की नहीं है यह एक जादुई चक्की है

इसका इस्तेमाल करना बेहद ही आसान है अगर तुम्हें कुछ भी चाहिए तो इस जादुई चक्की से कह दो यह तुम्हें दे देगा और जब रुकने को कहना हो तो इसके ऊपर लाल कपड़ा डाल देना यह सामान देना बंद कर देगा रामलाल ने यह सब सुना और उन तीनों को धन्यवाद करते हुए वहां से चला गया

chakki ki kahani

रामलाल उस जादुई चक्की को लेकर अपने घर आया और नीचे एक कपड़ा बिछाया और जादुई चक्की को कपड़े को पर रख दिया और अपनी बीवी से एक लाल कपड़ा लाने को कहा और रामलाल ने उस चक्की को घुमाया और कहा मुझे दाल दे दो और चक्की ने दाल देना शुरू कर दिया

जैसे ही दाल वाली टोकरी भर गई रामलाल ने जादुई चक्की के ऊपर लाल कपड़ा डाल दिया और इसके बाद उसने चक्की घुमाया और चावल मांगा और चक्की ने चावल देना शुरू कर दिया और जैसे ही कटोरा भरा तो रामलाल ने चक्की के ऊपर लाल कपड़ा डाल दिया उस दिन उसके परिवार वालों ने भरपेट खाना खाया

इसी प्रकार रामलाल हर दिन उस जादुई चक्की से तरह-तरह की चीज मांगा करता और अपने परिवार को खिलाया करता था एक दिन उसने सोचा क्यों नहीं मैं इस चक्की के द्वारा पाए गए सामान को बाजार में बेचू इससे मैं अच्छे खासे पैसे भी कमा सकता हूं

रामलाल ने जादुई चक्की से आटा, चावल,,दाल,चने आदि सब मांगा और यह सब लेकर वह  बाजार में जाता और इन चीजों को बेचा करता था और कुछ ही दिनों में वह अच्छे खासे पैसे कमाने लगा और ऐसा ही चलता गया और 1 महीने बाद उसने अपना एक अच्छा सा घर बना लिया

अब वह बड़े ही शान से रहा करता था परंतु उसका भाई हरिलाल उसकी यह सफलता देख नहीं पा रहा था वह सोच रहा था कुछ महीनों पहले मेरे पास पैसे मांगने आया था परंतु आज इसके पास घर भी है और अच्छे खासे पैसे भी हैं

एक दिन हरिलाल रामलाल के घर में छुप कर घुस गया और यह पता करने लगा उसके पास इतने पैसे आए कहां से तो उसे चक्की वाली बात पता चल गई उसे यह पता चल गया कि चक्की से मांगने पर हर एक चीज मिल जाती है

1 दिन हरिलाल ने रामलाल के घर में घुसकर वह  जादुई चक्की चुरा ली और अपने परिवार वालों को लेकर उस गांव से भागने की योजना बनाई

वह नाव के द्वारा नदी पार करके दूसरे गांव में जाने की तैयारी में लग गया और अगली सुबह वह जादुई चक्की और अपने परिवार वालों को लेकर नाव में बैठकर दूसरी गांव की तरफ निकल गया उसने जादुई चक्की का इस्तेमाल नाव के ऊपर ही करना शुरू कर दिया और और चक्की को घुमाकर चक्की से कहने लगा मुझे नमक दो चक्की देर में नमक देना शुरू कर देती है

परंतु हरिलाल जादुई चक्की चुराने की ख़ुशी में यह देखना ही भूल गया की जादुई चक्की से जब कुछ नहीं चाहिए तो उसे बंद कैसे करें और चक्की नमक देता ही गया और नमक के भार से नाव बहुत ही भारी हो गया और नाव नमक का वजन सह नहीं पाया

उसी समुद्र में डूब गया और हरिलाल और उसका परिवार उसी समुद्र में डूब कर मर गए शायद वह जादुई चक्की आज भी चल रही है और उसी प्रकार नमक दे रही है तभी कहा जाता है कि समुद्र का पानी बहुत ही ज्यादा खारा है शायद यही कारण है

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