imaandaar lakkad hara ki kahani

Imaandar lakadhara – ईमानदार लकड़हारा एक गांव एक बहुत ही गरीब इमानदार लकडहारा रहता था गरीब लकडहारा किसी तरह लकडिया काटकर अपना जीवन यापन कर रहा था  ईमानदार लकड़हारा  सुबह-सुबह जंगल में लकड़ियां काटने चला जाता था एक दिन

जब वह 1 सुबह-सुबह जंगल में लकड़ियां काटने गया तो वह एक नदी के किनारे पेड़ के पास पहुंचा और वह उस पेड़ को काटने लगा अचानक उसकी कुल्हाड़ी पेड़ को काटते काटते नदी में जा गिरी तथा उसने निराश होकर कहा कि मेरी कुल्हाड़ी अब नदी में गिर गई है

lakadhare ki kahani

अब मैं लकड़िया कैसे काटूँगा और मेरे पास तो अब कोई कुल्हाड़ी भी नहीं है,  हे भगवान मेरी मदद करो तभी नदी में से एक देवी प्रकट हुई तथा देवी ने लकड़हारे को कहा कि तुम रो क्यों रहे हो पुत्र लकड़हारे ने देवी को कहा मां मेरी मदद कीजिए मैं एक बहुत ही गरीब लकड़हारा हूं मेरी कुल्हाड़ी पानी में गिर गई है

देवी ने कहा रुको पुत्र मैं तुम्हें तुम्हारी कुल्हाड़ी वापस देती हूं तथा तभी देवी ने नदी के अंदर से लकड़हारे को एक सोने की कुल्हाड़ी लाकर देती हैं यह लो तुम्हारी कुल्हाड़ी तो लकड़हारा कुल्हाड़ी देखकर बोलता है

नहीं-नहीं मां यह मेरी कुल्हाड़ी नहीं है देवी ने चांदी से बनी एक कुल्हाड़ी नदी में से निकाली और बोला यह लो पुत्र तुम्हारी कुल्हाड़ी क्या यह तुम्हारी कुल्हाड़ी है तब लकडहारा माँ से बोलता है कि मेरी कुल्हाड़ी तो बहुत साधारण लोहे से बनी हुई है

आप मुझे वह लौटा दीजिए देवी ने तुरंत नदी से लोहे की कुल्हाड़ी निकाली और बोला यह लो पुत्र यह तुम्हारी कुल्हाड़ी और लकड़हारे ने प्रसन्न होकर कहा हां हां मां यही है मेरी कुल्हाड़ी और देवी ने लकड़हारे को कहा तुम बहुत गरीब हो

अगर तुम चाहते तो तुम यह सारी कुल्हाड़ी अपने पास रख लो यह तुम्हारी ईमानदारी का इनाम है तथा लकड़हारा खुशी-खुशी अपने गांव पहुंचता है तीनों कुल्हाड़ी लेकर और अपने घर पहुंच कर अपनी पत्नी को तीनों कुल्हाड़ी के बारे में सारी घटना बताएं

इस तरह से गरीब लकडहारा अमीर हो जाता है और अपनी पूरी जिंदगी बड़े अच्छे से जीता है

एक आदमी अपनी गरीबी के कारण इतना परेशान हो चुका था कि वह अपना जीवन एक नदी  के अंदर कूदकर समाप्त करना चाहता था जो वह आदमी नदी के समीप पहुंचा वह नदी के पास एक साधु रहता था जिसने उसे ऐसा करने से रोका साधु ने उस आदमी से अपनी खुदकुशी करने का कारण पूछा

तब उस आदमी ने साधु  को अपने बारे में सब कुछ बताया उसकी परेशानी सुनने के बाद साधु ने कहा मेरे पास इसका एक उपाय है मेरे पास एक ऐसा ज्ञान है जिसके द्वारा मैं एक जादू घड़ा बना सकता हूं जिसके द्वारा वह अपनी सारी इच्छाएं पूरी कर सकता है लेकिन जब भी उसके द्वारा  वह घड़ा टूटा जाएगा उससे सब कुछ छीन जाएगा

साधु ने उस आदमी से कहा अगर तुम मेरी 3 साल तक सेवा करते हो तभी वह घड़ा मैं तुम्हे दे सकता हूं अगर 5 साल तक तुम मेरी सेवा करते हो तो मैं तुम्हें घड़ा बनाने का मंत्र सिखाऊंगा आदमी ने कहा साधु महाराज मैं आपकी 3 साल तक ही सेवा कर सकूंगा क्योंकि मुझे जल्द से जल्द ही यह घड़ा चाहिए और मैं इसे जीवन भर बहुत संभाल कर रखूंगा और  इस घड़े को मैं टूटने नहीं दूंगा

उस आदमी ने 3 साल तक सेवा करने के बाद उस घड़े को प्राप्त किया और खुशी-खुशी अपने घर की तरफ चला गया तथा जादुई घड़े के द्वारा उसने अपनी सारी इच्छाओं को  पूरा करना शुरू किया सबसे पहले उसने अपने रहने के लिए एक खूबसूरत महल मांगा तथा उसके बाद उसने धन दौलत मांगे जिसके कारण उसके चर्चा आसपास होने लगी

और वह सभी लोगों को बुलाकर अपने महल के अंदर अच्छे-अच्छे खाना का दावत देने लगा और उसने अब शराब भी पीनी  शुरू कर दी थी एक दिन उसने शराब पीकर नशे में उस घड़े को अपने सिर पर रख लिया और नाचने लगा अचानक घड़ा उसके सिर से नीचे की तरफ गिर गया और टूट गया और इसी तरह खड़ा टूटते ही सब कुछ गायब हो गया

अब वह आदमी पछताने लगा कि काश मैं शराब पीकर यह सब कुछ नहीं करता तथा साधु महाराज से घड़ा बनाने की विद्या  पहले ही सीख ली होती

नैतिक मूल्य

 हमें कोई भी काम जल्दी में नहीं करना चाहिए बल्कि हमें उसके बारे में गहरा ज्ञान होना हमें अनुभवी  बनाता है

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