hindi kahaniya : भगवान सभी की सहायता करते है

hindi Story – एक समय की बात है कि किसी गांव में एक पुजारी जी रहा करता था kahaniya वह बहुत ही आलसी था और सभी कामों को भगवान के भरोसे छोड़ दिया करता था 1 दिन गांव में सरपंच ने पंचायत बुलाई जिसमें पुजारी भी आया था सरपंच ने सभी गांव वालों को बताया कि हमारे गांव पर एक विकट समस्या आ गई है

हमारे गांव के पास बने बांध में दरार आ गई है और बांध कभी भी टूट सकता है और अगर बांध टूटा तो पूरा गांव बह जाएगा और फिर पुजारी बोलने लगा कि परेशान क्यों होते हो भगवान सब को बचाएंगे तो फिर एक गांव वाला कहने लगा कि हम भगवान भरोसे नहीं रह सकते हैं हमें इससे बचने के लिए कुछ करना पड़ेगा और उसने कहा कि हमें जिला अधिकारी से जाकर बात करनी चाहिए वह कुछ हाल बताएंगे 

सरपंच और गांव के लोग जिला अधिकारी के पास गए और उनसे मदद मांगने लगे और जब जिला अधिकार ने गांव के बांध का निरीक्षण किया तो उसने गांव में यह घोषणा करवा दी कि गांव का बांध कभी भी टूट सकता है इसलिए गांव जल्दी से जल्दी खाली करके यहां से चले जाओ यह घोषणा सुनते ही गांव में भगदड़ सी मच गई और सभी लोग अपने कीमती सामान लेकर गांव से बाहर जाने लगे

लेकिन उस पुजारी को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ा कि गांव में बाढ़ आने वाली है वह हमेशा की तरह मंदिर में बैठा हुआ था तभी वहां से एक औरत गुजरी और पुजारी के पास रुक कर बोली पुजारी जी आप गांव से बाहर नहीं जा रहे हैं पुजारी बोला मैं मंदिर छोड़कर नहीं जाऊंगा और मुझे मेरे भगवान बचाएंगे और पुजारी की बात सुनकर वह औरत वहां से चली गई

धीरे-धीरे पानी गांव में आने लगा लेकिन पुजारी मंदिर से नहीं गया और अब तो पानी का स्तर भी बढ़ने लगा था और पुजारी और ऊंचाई पर जाकर बैठ गया तभी एक बैलगाड़ी वाला मंदिर के पास से जा रहा था उसने पुजारी से कहा पुजारी जी मेरे साथ चलो गांव में पानी बढ़ता ही जा रहा है पुजारी ने फिर कहा तुम जाओ मुझे मेरे भगवान बचाएंगे यह सुनने के बाद बैलगाड़ी वाला वहां से चला गया

अब पानी का स्तर की गांव की झोपड़ी पानी में समा गए थे तभी वहां से एक नाव वाला गुजरा और उसने पुजारी से कहा पुजारी जी जल्दी नाव में बैठ जाओ पानी का स्तर बढ़ता ही जा रहा है पुजारी ने कहा कि हम उनमें से नहीं जो समस्या को देख कर भाग जाए और मुझे तो मेरा भगवान बचाएँगे

इतना सुनते ही नाव वाला वहां से चला गया अब पानी का स्तर मंदिर की चोटी तक पहुंच चुका था और पुजारी मंदिर की चोटी को पकड़ कर बैठा हुआ था तभी वहां पर हेलीकॉप्टर से आया और उसने एक रस्सी नीचे लटकाई और पुजारी से बोला

इस रस्सी को पकड़ के ऊपर आ जाओ पुजारी कहने लगा तुम जाओ मुझे मेरे भगवान बचाएंगे उस फौजी ने दोबारा पुजारी से कहा रस्सी पकड़ के ऊपर आ जाओ और पुजारी ने मना कर दिया और वह फौजी वहां से चला गया और पानी का स्तर बढ़ने के कारण पुजारी डूबकर मर गया पुजारी मरने के बाद जब भगवान के पास गया तो फिर भगवान से यह प्रश्न पूछने लगा कि मैंने अपना सारा जीवन आपकी पूजा में समर्पण कर दिया पर जब मुझे आपकी जरूरत थी तब आप मुझे बचाने नहीं आए
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तब भगवान ने पुजारी से कहा भक्त मैंने तुम्हारी हमेशा मदद कि है मैं तुम्हारी जान बचाने एक बार नहीं कई बार आया पर तुम मुझे पहचान ही नहीं पाए पहले मैं उस औरत के रूप में तुम्हारे पास आया और बाद में उस बैल गाड़ी वाले के रूप में और उसके बाद मैं नाव वाले के रूप में आया और अंत में मैं फौजी के रूप में आया 

लेकिन तुम मुझे किसी भी रूप में नहीं पहचान पाए और फिर पुजारी भगवान से कहने लगा क्षमा करें भगवान जी वह सब तो इंसान थे आप स्वयं तो नहीं आए तो फिर भगवान ने जवाब दिया मैं स्वयं कभी किसी की मदद करने नहीं आता मैं किसी न किसी जरिए से अपने भक्तों की मदद करता हूं और भगवान ने यह भी कहा कि मेरा काम है सिर्फ रास्ता दिखाना है रास्ते पर चलना या ना चलना यह तुम्हें सोचना है

सीख इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें हर समय भगवान के भरोसे नई बैठना चाहिए बल्कि उनके दिए गए इशारों को समझना चाहिए

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( क्या इंसानियत बाकी है )

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किसी शहर में बृजेश नाम का एक भिखारी रहा करता था वह शहर के चौराहे पर बैठकर आने जाने वालों से भीख मांगा करता था उसे भीख मांगना बिल्कुल पसंद नहीं था पर उसे यह मजबूरी में करना पड़ता था बृजेश आने जाने वालों के सामने साहब भगवान के नाम पर कुछ दे दो भगवान आपको बहुत देगा यह सब लाइन बोलकर उनको अपनी तरफ आकर्षित करता था

लोग यह सब सुनकर उसको कुछ ना कुछ दे दिया करते थे इसी तरह समय गुजरता जाता है और बृजेश को भीख मांगने की आदत सी हो जाती है और इसी काम को अपना भाग्य समझकर अपना लेता है एक दिन वह अपनी पहली वाली जगह से हटकर दूसरी जगह भीख मांगने जाता है

बृजेश दूसरी जगह जाने पर भी आने और जाने वाले के सामने भगवान के नाम पर कुछ दे दो यह बोलता रहता है और लोग थोड़े बहुत पैसे डालते जाते हैं आधा दिन बीतने के बाद बृजेश वहां से जाने लगता है तभी वह देखता है एक आदमी उसकी तरफ आ रहा है तो बृजेश सोचने लगता है यह आदमी कुछ ज्यादा पैसे दे देगा इसलिए दोबारा वहीं बैठ जाता है और उसके आने पर वह कहता है

भगवान आपका भला करेगा कुछ खाने पीने को दे दो तो फिर वह आदमी उससे कहने लगता है कि तुम अच्छे खासे हो कर भी भीख मांगते हो तुम्हें अपने आप पर शर्म आनी चाहिए इतना सुनते ही बृजेश कहता है साहब अगर मुझे नौकरी मिलती तो मैं भीख क्यों मांगता और आपको कुछ देना है तो दो मेरा इस तरह मजाक मत करो

इतना सुनते ही आदमी बृजेश सामने कुछ पैसे रखकर वहां से चला जाता है यह सब सुनने के बाद बृजेश मन ही मन में यह ठान लेता है कि अब मैं भीख नहीं मांगूंगा अगले कुछ दिनों तक बृजेश भीख नहीं जाता है पर जब उसके पैसे खत्म हो जाते हैं और खाना पीना भी खत्म हो जाता है तो उसे मजबूर होकर भीख मांगने जाना पड़ता है

पूरे दिन भीख मांगने के बाद बृजेश अपने घर की तरफ जा ही रहा था कि वह आदमी दोबारा उसके सामने आ जाता है और वह आदमी बृजेश से यह सवाल करता है कि तुम इतने दिनों तक कहां थे जब से मैंने तुम्हारी आधी अधूरी कहानी सुनी है तब से न मै ढंग से सो पाता हूं और ना ही ढंग से काम कर पाता हूं और वह आदमी बृजेश से पूछता है कि वह क्या वजह है जिसकी वजह से तुम भीख मांगते हो

उस आदमी की बात सुनकर बृजेश सोच में पड़ जाता है और मन ही मन में यह सोचता है कि आदमी दिल से तो अच्छा लगता है मुझे सब कुछ बता देना चाहिए और फिर बृजेश उस आदमी को अपनी कहानी विस्तार से बताना शुरू करता है वह कहता है कि मुझे कोई बीमारी है जिसकी वजह से मैं जहां भी काम करने जाता हूं 

वहां के लोग यह सोच कर मुझे काम नहीं देते कि यह बीमारी मुझे भी हो जाएगी इतना सुनते ही वह आदमी भावुक हो जाता है और वह आदमी बृजेश से पूछता है तुम कहां तक पढ़े हुए हो बृजेश उस आदमी को बताता है कि मैंने ग्रेजुएशन की है और मैं एक अनाथ हूं और मैं पहले अनाथालय में रहा करता था

परंतु जब उनको इस बीमारी के बारे में पता चला तब उन्होंने मुझे वहां से बाहर निकाल दिया यह सब सुनने के बाद वह आदमी बृजेश से कहता है क्या तुम मेरे साथ काम करोगे  मैं तुम्हारे रहने खाने-पीने और इलाज का बंदोबस्त भी कर दूंगा बृजेश यह सुनते ही उस आदमी से पूछता है क्या आप सच कह रहे हो अगले दिन वह आदमी बृजेश को बाजार ले जाता है और उसे कुछ कपड़े दिला देता है

और अगले दिन वह उस आदमी के साथ ऑफिस में आता है बृजेश उस आदमी से पूछता है कि आप यहां काम करते हो वह आदमी उत्तर देता है कि मैं यहां काम नहीं करता मैं यहां लोगों से काम करवाता हूं और उसी दिन से बृजेश भी वहां काम करना शुरू कर देता है और धीरे-धीरे बृजेश सब काम सीख लेता है

और कुछ ही सालों में वह उस कंपनी का सबसे चहिता employee बन जाता है इससे वह आदमी बहुत खुश होता है कि मैंने बृजेश को चुनकर कोई गलती नहीं की उसने मेरे फैसले को सही साबित कर दिया बृजेश अपनी कामयाबी का श्रेय अपने बॉस मतलब वही आदमी जिसने एक भिखारी को एक अच्छा खासा इंसान बना दिया को देता है

सीख तो हमें इस कहानी से यह शिक्षा मिलती है कि हमें इंसानियत को कभी नहीं भूलना चाहिए क्योंकि एक इंसान ही है जो एक दुसरे इंसान की मदद कर सकता है 

गरीब की किस्मत (kahaniya)

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kahaniya | story

एक समय की बात है कि एक राज्य में राजा विक्रमादित्य का शासक था राजा विक्रमादित्य की पत्नी ने  एक राजकुमार को जन्म दिया राजकुमार के जन्म से राजा विक्रमादित्य बहुत खुश थे कुछ दिनों के बाद एक पंडित राजा विक्रमादित्य से मिलने आए और पंडित महाराज से कहने लगे महाराज की जय हो

और महाराज ने कहा मेरे पुत्र को आशीर्वाद दो और पंडित जी राजा से कहने लगे राजकुमार किस्मत के धनी है यह राज्य को हमेशा आगे बढ़ाएंगे लेकिन राजकुमार का विवाह एक गरीब लड़की से होगा इतना सुनते ही महाराज विक्रमादित्य पंडित जी पंडित से कहने लगे नहीं ऐसा नहीं हो सकता

मेरे पुत्र का विवाह किसी गरीब लड़की से नहीं होगा बल्कि एक राजकुमारी के साथ होगा और फिर पंडित जी कहने लगे महाराज आप कुछ भी कर सकते हैं पर किस्मत का लिखा हुआ नहीं बदल सकते इतना सुनते ही महाराज पंडित जी से कहते हैं कि आप मुझे बता सकते हैं कि वह लड़की अभी कहां होगी

राजा के पूछने पर पंडित जी अपनी झोली में से किताब निकालते हैं और कुछ मंत्र पढ़ते हुए किताब की तरफ देखते हैं जिसके बाद उस किताब में एक छोटी बच्ची की तस्वीर दिखने लगती है और पंडित जी राजा से कहते हैं यह वही लड़की है जिसका विवाह राजकुमार के साथ होगा और इस वक्त यह लड़की आपके राज्य से कुछ ही दूर एक छोटे से गांव में है

पंडित जी की बात राजा पर बहुत अधिक प्रभाव डालती है और इसके बाद राजा विक्रमादित्य अपने पुत्र यानी राजकुमार से किसी भी आम आदमी का मिलना बंद कर देते हैं और ज्यादातर उन्हें महल के अंदर रहने को ही बोलते हैं इसी तरह कई वर्ष बीत जाते हैं और राजकुमार एक युवा लड़के बन जाते हैं

लेकिन अभी भी राजा उन्हें महल से बाहर नहीं जाने देते राजकुमार अपने पिता राजा विक्रमादित्य से पूछते हैं कि आप हमें महल से बाहर क्यों नहीं जाने देते इस महल में रहते हुए हमारा दम घुटने लगा है और फिर राजा विक्रमादित्य कहते हैं की जो भी हम कर रहे हैं यह तुम्हारी भलाई के लिए है

इतना सुनते ही राजकुमार अपने कमरे की तरफ चल देते हैं और अगले दिन राजा विक्रमादित्य कि 50 वी जन्मदिन की तैयारी शुरू हो जाती है जिसके काम के लिए राज्य और राज्य के पास वाले गांव से कुछ लोगों को बुलाया जाता है उन्हीं लोगों के बीच अनुराधा भी महल में काम करने को आती है

और राजकुमार सभी लोगों से कहते हैं कि कुछ दिनों बाद मेरे पिताजी का जन्मदिन है और उसी की तैयारी के लिए आप सब लोगों को यहां बुलाया गया है और आप लोग मन लगाकर काम करिए जिसके लिए आप लोगों को 10 सोने के सिक्के दिए जाएंगे

इसके बाद सब लोग अपने-अपने काम में मगन हो जाते हैं और कुछ देर बाद राजकुमार जैसे ही काम की जांच करने के लिए रसोई घर में प्रवेश करते हैं तो उनकी मुलाकात अनुराधा से होती है और फिर राजकुमार कहते है बहुत अच्छे खुशबू आ रही है क्या मैं थोड़ा चख सकता हूं और फिर अनुराधा राजकुमार को थोड़ा खीर खाने को देती है और राजकुमार खाने के बाद कहते हैं कि आपके हाथों में तो जादू है

और आपका नाम क्या है और आप कहां से आई है अनुराधा उत्तर देती है कि मैं राज्य के पास वाले गांव से आई हूं और राजकुमार अनुराधा की सुंदरता और सादगी से बहुत प्रभावित हो जाते हैं और वह दोनों हर रोज मिलने लगते हैं इसी तरह कुछ दिन बीत जाते हैं और राजा का जन्मदिन भी आ जाता है जन्मदिन के धूमधाम में राजा विक्रमादित्य अपने पुत्र को अनुराधा के साथ बैठे देख कर बहुत गुस्सा हो जाते हैं और मन ही मन में सोचते हैं कि हमें इसे जल्द ही महल से बाहर निकालना होगा

राजा विक्रमादित्य अनुराधा को महल से बाहर निकालने वाले होते हैं कि पंडित जिसने राजकुमार का भविष्य बताया था वह आ जाते हैं और महाराज से कहते हैं महाराज आपको जन्मदिन मुबारक हो और राजा विक्रमादित्य पंडित जी से कहते हैं अच्छा हुआ कि आप आ गए और इस लड़की को देखकर बताइए कि यह वही लड़की है 

इतना सुनते ही पंडित जी अपनी किताब निकालते हैं और कुछ मंत्र पढ़ते हैं फिर किताब में उसी लड़की की तस्वीर दिखने लगती है तस्वीर देखकर पंडित जी कहते हैं हां यह वही लड़की है जिससे राजकुमार का विवाह होगा इतना सुनते ही राजा विक्रमादित्य बहुत क्रोधित हो जाते हैं और अनुराधा को महल से बाहर निकालने की तरकीब सोचने लगते हैं

अगले दिन राजा विक्रमादित्य अनुराधा को अपने राज्य की सीमा पर बहने वाली नदी के पास ले जाते हैं और अनुराधा को नदी में धकेल देते हैं फिर कहते हैं ना यह लड़की बचेगी और ना ही मेरे पुत्र का विवाह इस गरीब लड़की से होगा और राजा वहां से चले जाते है

यह सब एक मछुआरा देख लेता है और फिर क्या मछुआरा अपनी नाव लेकर पानी में निकल जाता है और किसी तरह अनुराधा को बचा लेता है कुछ दिनों तक अनुराधा बेहोश रहती है कुछ दिनों बाद जब उसे होश आता है तो मछुआरा उसे देख कर बहुत खुश होता है

अनुराधा से कहता है अच्छा हुआ तुम्हें होश आ गया हूं नहीं तो कुछ दिनों से तुम्हें बेहोश देख कर मुझे डर लगने लगा था और फिर अनुराधा मछुआरे से पूछती है कि मुझे तो राजा ने पानी में गिरा दिया था तो मैं यहां कैसे आई और फिर मछुआरे ने अनुराधा को सब कुछ बता दिया

सब कुछ सुनते ही अनुराधा की आंखों में आंसू आ जाते हैं और इसके बाद अनुराधा कुछ दिनों तक मछुआरे के घर पर ही रुकती है और जब वह पूरी तरह स्वस्थ हो जाती है तो महल की तरफ निकल जाती है अनुराधा को जीवित एक राजा हक्का-बक्का रह जाता है

फिर सोचते है मैं तो इसे नदी में फेक के आया था तो यह जीवित कैसे हैं और फिर राजा विक्रमादित्य एक और योजना बनाते है अगले दिन अनुराधा और राजकुमार को अपने साथ उसी नदी किनारे ले जाते है वहां पहुंचने पर राजा विक्रमादित्य राजकुमार के हाथ से अंगूठी निकालकर नदी में फेंक देते हैं और अनुराधा से कहते हैं

अगर तुमने यह अंगूठी नदी में से निकाल ली तो मैं तुम्हारा विवाह राजकुमार से करवा दूंगा और इतना कहते ही राजा विक्रमादित्य राजकुमार को लेकर वहां से चले जाते हैं और फिर राधा सोचने लगती है कि इतने बड़े नदी में अंगूठी कैसे मिलेगी और अंगूठी ढूंढने के लिए अनुराधा उसी मछुआरे के पास रहने लगती है और जैसे जैसे दिन निकलते हैं अनुराधा की उम्मीद भी कम होती जाती है

एक दिन मछुआरा नदी में से बहुत सारी मछलियां पकड़ के लाता है और उन्हें बाजार में बेचने को जाने ही वाला होता है कि तभी अनुराधा मछुआरे से कहती है क्या मैं इसमें से एक मछली निकाल सकती हूं क्योंकि आज मेरा मछली खाने का मन कर रहा है और मछुआरा कहता है निकाल लो सब तुम्हारा ही तो है और अनुराधा मछलियों के ढेर में से एक मछली निकालती है

जैसे ही उसे साफ करने के लिए काटती है तो अनुराधा को मछली के पेट में कुछ चमकता हुआ दिखाई देता है और जैसे ही वह उस चमकती हुई चीज को हाथ में लेती है तो वह खुशी से नाचे लगती है और सोचती है यह राजकुमार की अंगूठी है जो राजा ने नदी में फेंक दी थी और  अनुराधा अंगूठी को लेकर राजा के पास पहुंच जाती  है और राजा को वह अंगूठी देती है

और राजा शर्त के अनुसार राजकुमार और अनुराधा की शादी धूमधाम से करवा देता है और इसके बाद सब लोग खुशी-खुशी रहने लगते हैं

 

तोते की कहानी

 एक समय की बात है एक घने जंगल में एक विशाल बरगद का पेड़ था और उस पेड़ पर एक तोते का झुंड रहा करता था उस झुंड में सभी तोते बहुत अधिक बोला करते थे और सभी तोते कहा करते थे कि तोते का काम ही होता है बोलना इसीलिए हम तोते बहुत अधिक बोलते हैं

परंतु उसी एक झुंड में एक मिठू नाम का तोता रहा करता था और वह बहुत कम बोला करता था इसीलिए सभी तोते उसको नकली तोता कहां करते थे

 परंतु मिठू तोता कभी भी उन सभी तोते की बातों का बुरा नहीं माना करता था  परंतु सभी तोते उसका हमेशा नकली तोते नकली तोते के नाम से बुलाते रहते थे और एक समय की बात है कि मुखिया तोते के घर पर चोरी हो जाती है और मुखिया तोते की पत्नी कहती है कि मैंने उस चोर को देखा है परंतु वह पूरी तरीके से पहचान नहीं पाती इसलिए कहती है मैंने सिर्फ उसकी चोच देखी थी और उस तोते की चोच लाल थी

 मुखिया तोता सभी तोते को बुलाता है और कहता है कि मेरे घर में किसी ने चोरी की है और मेरी पत्नी ने उस चोर को देखा है परंतु मेरी पत्नी उसे पूरी तरीके से पहचान नहीं पा रही  है और मेरी पत्नी ने सिर्फ उसका चोच देखा है और उसकी चोट लाल रंग की थी और हमारे झुंड में सिर्फ दो ही तोते हैं जिनकी चोच लाल है वह है मिठू और बिट्टू

मिठू का नाम सुनते ही सभी तोते कहने लगते हैं हमें तो लगता है कि चोरी तो नकली तोते ने की है मतलब मिठू ने की है और इसे जल्दी से जल्दी सजा मिलनी चाहिए परंतु मुखिया यह सोचता है की मैं इस झुंड का मुखिया हूं और मुझे समझदारी से काम लेना चाहिए कहीं निर्दोष को सजा मिल गई तो मेरी इज्जत और मुझसे मुखिया का पद छीन लिया जाएगा

इसलिए मुखिया तोता एक बहुत बुजुर्ग कौवे के पास जाता है और उस कौवे से कहता है मैं बड़ी ही संकट में फंस गया हूं और मुझे लगता है आप ही मुझे इस समस्या से निकाल सकते हैं और मुखिया तोता सब कुछ उस कौवे को बता देता है और कौवे कहता है

कल सुबह आकर मैं इसका हल बताऊंगा और अगले सुबह वह कौवा आता है और मिठू और बिट्टू दोनों से सवाल करता है कि चोरी के वक्त तुम दोनों कहां थे तो बिट्टू बहुत तेजी और ऊंची आवाज में कहता है मैं तो बाहर से दाना खाने के बाद अपने घोसले में सोने चला गया था

मिठू बड़े आराम से कहता है कि मैं तो अपने घोसले में ही सो रहा था और इतना सुनते ही कौवा समझ जाता है कि कौन झूठ बोल रहा है और कौन सच बोल रहा है और कौवा कहता है कि बिट्टू तोते ने चोरी की है क्योंकि झूठा हमेशा अपने आप को सच बनाने के लिए ऊंची आवाज में बोलता है परंतु मिठू ने बड़े आराम से उत्तर दिया और यह घबराया भी नहीं क्योंकि यह बिल्कुल सच बोल रहा था

इसके बाद सभी तोते कहने लगे कि बिट्टू को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए और इस झुंड से बाहर निकाल देना चाहिए और मुखिया भी कहने ही वाला था तभी मिठू बोला मुखिया जी बिट्टू ने यह गलती पहली बार की है और पहली गलती तो भगवान भी माफ कर दिया करता है

मैं चाहता हूं हम सब भी इस गलती को भूल जाए और बिट्टू को माफ कर दे और बिट्टू रोता रोता कहता है मुझे माफ कर दो अगली बार से यह गलती नहीं होगी और मैं जीवन में कभी ऐसी गलती नहीं करूंगा

इस तरह मिठू के प्रति सभी के मन में सम्मान की भावना आई और फिर कभी भी मिठू को नहीं चिढाया गया

सपने वो हैं वो हमें सोने नहीं देते

 एक समय की बात है  अगवानपुर  नामक गांव में एक लड़का रहा करता था और वह लड़का सरकारी स्कूल में आठवीं क्लास में पढ़ता था और उसके पिता एक अमीर आदमी के घर पर  गाड़ियां साफ़ करते  थे सभी गाड़ियां लग्जरी थी और वह लड़का कभी कबार अपने पिता के साथ काम पर भी जाया करता था और देखता था कि मेरे पिता हर प्रकार की लग्जरी गाड़ी को साफ करते हैं और वह सपना देखता था कि एक दिन यह सब गाड़ियां मेरे पास होगी  जिस तरह अमीर लोग सुन्दर और बड़े घरो में रहते हैं मैं भी इसी प्रकार के घर में रहूंगा

 एक दिन वह लड़का स्कूल जाता है और अध्यापक महोदय सभी बच्चों  से कहते हैं कल सभी बच्चों को अपने सपनों पर निबंध लिख कर आना है और जो अच्छा लिख कर लाएगा उसे पास कर दिया जाएगा और जो अच्छा नहीं लिखेगा उसे फेल कर दिया जाएगा सभी बच्चे निबंध लिखकर लाएं और सभी बच्चे पास भी हो गए लेकिन वह लड़का  पास नहीं हुआ वह लड़का सोचने लगा कि सभी बच्चे तो पास हो गए परंतु मैं क्यों नहीं हुआ इसीलिए वह अध्यापक जी के पास गया

उनसे कहने लगा अध्यापक जी सभी बच्चे पास हो गए परंतु मैं क्यों नहीं हुआ अध्यापक जी कहने लगे निबंध में तुम  वह लिखते जो तुम्हारे हक हो सकता था परंतु तुमने निबंध में लिखा जो कभी पाया ही नहीं जा सकता और जिसे पाना बहुत मुश्किल है तो मैं तुम्हें पास कैसे कर दूं मैंने तुम्हारे सपने लिखने के लिए कहा था परंतु तुम तो कुछ भी लिख कर ले आए वह लड़का कहता है मैंने तो अपने सपने ही लिखे हैं जिसे मैं किसी भी हालत में पाकर रहूंगा

 अध्यापक ने बच्चे से कहा मैं तुम्हें एक और बार मौका देता हूं और तुम को दोबारा लिख सकते हो बच्चे ने कहा कोई जरूरत नहीं क्योंकि अगली बार भी मैं यही  लिखूंगा मुझे फिक्र नहीं कि मैं पास हूं या फेल परंतु मेरे सपने कभी नहीं बदलेंगे और अध्यापक ने कहा तुम्हारी मर्जी और अध्यापक ने उस बच्चे को फेल कर दिया

 बहुत सालों बाद एक आदमी अपने  success की कहानी सुना रहा था और अध्यापक महोदय भी उस कहानी को सुन रहे थे और जब उस आदमी ने अपनी कहानी खत्म की उसके बाद वह आदमी अध्यापक महोदय के पास आया और अध्यापक महोदय के चरण छुए और कहने लगा अध्यापक महोदय आपने मुझे पहचाना अध्यापक महोदय ने बोला मुझे पता नहीं क्या आप कुछ बता सकते हो आप कौन हो उस आदमी ने कहा मैं वही बच्चा हूं जिसे आपने  अपने सपने पर निबंध लिखने में फेल कर दिया था इसके बाद अध्यापक जी के आंखों में आंसू आ गए और उन्हें समझ आ गया कि सपने इंसान को कुछ भी करने के लिए प्रेरित कर सकता है

 सीख  दोस्तों जिंदगी में कुछ भी नामुमकिन नहीं है  बस शर्त है कि जो भी आप सपना देखे उसको पूरा करने के लिए  कुछ काम भी करें और हर दिन अपने सपनों के लिए करें और हर दिन  सोचे क्या जो मैंने आज किया वह चीज मेरे सपने पूरा करने में मेरी मदद करेंगे और  अगर करेंगे तो उस चीज को करते रहिए लगातार करते रहिए

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