Duniya ki sabse achi kahani

एक समय की बात है दिल्ली एक मशहूर डॉक्टर जिसका नाम त्रिवेदी था एक दिन डॉक्टर त्रिवेदी को एक शहर से दूसरे शहर बहुत जरुरी काम से लोगों के सामने लेक्चर देने जाना था जिसके लिए उन्होंने एरोप्लेन से यात्रा करने की सोची

जब वह जहाज में बैठे तो उन्होंने अपना लैपटॉप खोला और लेक्चर की तैयारी करने लगे परंतु बारिश बहुत ही तेज हो रही थी जिसके कारण एरोप्लेन के कैप्टन ने कहा बारिश की वजह से मौसम खराब होने के कारण हम सबको पास ही के हवाई अड्डे पर उतरना पड़ेगा इतना सुनते ही डॉक्टर त्रिवेदी गुस्सा हो गए और जैसे ही एरोप्लेन ने जमीन पर लैंड किया तो वह सारे कर्मचारियों पर बरस पड़े

कहने लगे मुझे बहुत जरूरी काम से जाना था परंतु ना  जाने मैं वहां पहुंच भी पाऊंगा या नहीं और वहा लोग मेरा इंतजार जरूर कर रहे होंगे तभी यात्रियों में से एक आदमी बोला क्या आप डॉक्टर त्रिवेदी हो डॉक्टर ने बोला हा फिर वह आदमी बोला मैं आपको जानता हूं आप जिस लेक्चर में जा रहे हो मैं भी वहीं जा रहा हूं

मेरे ख्याल से अगर आप यहां से किसी टैक्सी के द्वारा जाओगे तो वह 3 घंटे में आपको वहां तक पहुंचा देगा डॉक्टर ने उस आदमी का शुक्रिया किया और हवाई अड्डे से बाहर निकले और एक टैक्सी बुक की और जगह के लिए निकल गए

 टैक्सी वाला डॉक्टर साहब को उनकी बोली हुई जगह पर ले जा रहे थे परंतु मौसम बहुत ही बेकार हो रहा था जिसकी वजह से टैक्सी वाला रास्ता भटक जाता है और वह डॉक्टर साहब को बता भी नहीं पाता क्योंकि टैक्सी वाले को लगता है पहले ही डॉक्टर साहब बहुत लेट हो चुके हैं

अगर मैं इन्हें बता दूंगा तो यह मुझ पर ही पर ही बरस पड़ेंगे परंतु कुछ देर कोशिश करने के बाद टैक्सी वाला हार मान गया और डॉक्टर साहब से बोला मुझे लगता है कि मैं रास्ता भटक गया हूं और इस आंधी और बारिश में रास्ता ढूंढना बहुत मुश्किल है चलो थोड़ी देर कहीं आराम कर लेते हैं

जब बारिश और आंधी थम जाएगी तब हम रास्ता ढूढेंगे डॉक्टर त्रिवेदी ने कहा चलो अब तो मुझे भी लगता है कि मैं वहां तक नहीं  पहुंच पाऊंगा चलो तुम मुझे कहीं ले चलो जिससे मैं इस आंधी और बारिश से बच सकूं

टैक्सी ड्राइवर थोड़ी दूर जाने के बाद देखता है कि एक झोपड़ी है और अपनी गाड़ी वहां पर रोक देता है और डॉक्टर साहब झोपड़ी का गेट   बजाते हैं अंदर से आवाज आती है जो भी है अंदर आ जाओ और दोनों अंदर जाकर बैठ जाते हैं और देखते हैं कि एक बूढ़ी अम्मा पूजा कर रही है और एक बच्चा बिस्तर पर सोया हुआ है थोड़ी देर बाद जब बूढ़ी अम्मा अपना पूजा समाप्त कर लेती है तो डॉक्टर साहब पूछते हैं क्या मुझे मोबाइल मिल सकता है

बूढ़ी अम्मा कहती है क्या बेटा तुम मजाक कर रहे हो क्या इस झोपड़ी में,  ऐसे गांव में जहां लाइट ही नहीं है वहां तुम्हें मोबाइल मिलेगा बूढ़ी अम्मा कहती है चाय पीना है तो बताओ फिर डॉक्टर साहब ने बोला नहीं आप इतना कष्ट मत करो

डॉक्टर साहब ने बोला भगवान का धन्यवाद है कि आप मिल गए नहीं तो हम बारिश में भीग रहे होते तभी बूढ़ी अम्मा कहने लगी भगवान का शुक्रिया तो मैं उसी दिन करूंगी जब मेरे पोते का इलाज करने डॉक्टर आ जाएगा तभी डॉक्टर साहब ने पूछा इसे कौन सी बीमारी हुई है तो   बूढ़ी अम्मा ने कहा इसे बहुत गंभीर बीमारी है

लोग कहते हैं इस बीमारी का इलाज तो दिल्ली के बड़े डॉक्टर जिनका नाम डॉक्टर त्रिवेदी है वही मेरे पोते का इलाज कर सकते हैं और मुझे यह पता नहीं कि मैं दिल्ली कैसे जाऊंगी बस यही भगवान से मांगती रहती हु की किसी तरह से मेरे पोते का इलाज हो जाये यह बात सुनकर डॉक्टर साहब की आंखों में आंसू आ जाते हैं

डॉक्टर साहब कहते हैं मुझे लगता है आपकी  प्रार्थना भगवान ने सुन ली मेरा plan जहा जाने का था वहा भगवान् ने जाने ही नहीं दिया क्योकि आपकी दुआओं में इतना दम है की जिस टैक्सी को कहीं और जाना था वो आपकी झोपडी के पास आकर रुकी

मैं समझ गया भगवान की ही मर्जी थी मुझे जहां पहुंचना था वही पहुंच गया और डॉक्टर साहब कहते हैं मैं ही डॉक्टर त्रिवेदी हूं जो दिल्ली में रहता हु मैं आपके पोते का इलाज करने ही आया हु 

बुद्धिमानी 

एक किसान  जो बहुत गरीब था हर रोज लकड़ियां काटकर अपने बैलगाड़ी पर लाद कर शहर में बेचने ले जाया करता था

एक दिन किसान  जब शहर में लकड़ियां बेच रहा था उसी समय एक सेठ आता है और बोलता है पुरे का कितना लोगे किसान ने थोड़ी देर सोचा और बोला सेठ मै पुरे का 100 rs लूँगा सेठ ने कहा ठीक है तुम अपनी बैलगाड़ी मेरे पीछे पीछे मेरे घर ले आओ

घर पहुँचते ही किसान ने सारी लकडिया उतार दी और पैसे लेकर जाने लगा तभी सेठ ने कहा मैंने पुरे बैलगाड़ी के बारे में पूछा था इसलिए तुम बैलगाड़ी को अपने साथ नहीं ले जा सकते हो तभी किसान ने कहा सेठ में तो सिर्फ लकड़ियां बेच रहा हूं

पर सेठ ने कहा मैंने तुमसे सब कुछ के बारे में पूछा था और तुमने मुझे 100 rs बताएं तुम एक चौधरी  हो और अब तुम अपनी बात से कैसे मुकर सकते हो

इस तरह  सेठ ने चालाकी करके किसान को चुना लगा दिया और किसान को इस तरह अपने घर पर बिना बैलगाड़ी के वापस आना पड़ा

जब किसान अपने घर पर पहुंचा तब उसने यह सारी बात अपने चारों बेटों को बताइ सभी यह सुनकर बहुत ही ज्यादा परेशान हो गए उनमें से सबसे छोटा बेटा जो सबसे जादा होशियार था उसने कहा पिताजी आप मुझे उसके चेहरे के होलिया के बारे में बताइए मैं उसे सबक सिखाता हूं

अगले दिन किसान का सबसे छोटा बेटा बैलगाड़ी के ऊपर लकड़ी लेकर जाता है और सेठ के घर पर ही जाकर बैलगाड़ी रोकता है सेठ जैसे ही बैलगाड़ी को देखता है पूछता हैं कितने में बेचना चोह्गे पूरा

किसान का बेटा कहता है आप मुझे दो मुठी दाल दे देना और पूरा ले लेना सेठ खुश हो जाता है और कहता है ये तो बड़ा सस्ते का सौदा है

सेठ जल्दी से अपने घर के अन्दर जाता है और दो मुठी दाल ले आता है और कहता है लो अपनी दो मुठी दाल तभी किसान का बेटा एक छुरा निकालता है और कहता है सेठ अपनी मुट्ठी को मत खोलना

सौदा तो दो मुट्ठी दाल का हुआ है इसलिए मुझे तुम्हारी मुट्ठी भी चाहिए और इस तरह किसान का बेटा छुरा लेकर सेट की कलाइयों पर लगा देता और कहता है सेठ क्या मैं तुम्हारी दोनों मुठिया काट लूं

सेठ बहुत जादा घबरा जाता है तभी चौधरी का बेटा बोलता है सेठ जब तू लकड़ी के साथ पूरी बैलगाड़ी ले सकता है तो आज मै तेरी दोनों मुठिया लेकर जाऊंगा

सेठ समझ जाता है आज शेर को सवा शेर मिल गया है और सेठ कहता है तुम मुझे माफ़ कर दो मै तुम्हे कल वाली बैलगाड़ी भी लौटा दूंगा तभी चौधरी का बेटा कहता है साथ में 500 rs जुरमाना भी देना होगा

और सेठ को बैलगाड़ी के साथ साथ 500rs जुरमाना भी देना पड़ता है इस तरह चौधरी का समझदार बेटा दोनो बैलगाड़ी के साथ अपने गाव लौट जाता है

Moral – कई बार ऐसा होता है जब हमें कुछ चालक लोग बेवकूफ बनाने की कोशिश करते है इसलिए हमें हमेशा ऐसे लोगे से दिमाग से काम लेना चाहिए ताकि हम इनसे सही  ढंग से निपट सके

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दूसरी जादुई मंत्र की कहानी

एक आश्रम में 4 साधु रहते थे  चारो साधू में से एक साधू की पास बहुत कम जादुई ज्ञान था जबकि बाकी तीन विद्वान थे  इन तीनों को अपने ज्ञान के ऊपर बहुत ज्यादा घमंड था

इसलिए यह हमेशा चौथे साधू को अज्ञानी बताकर उसका मजाक उड़ाया करते थे एक दिन सभी साधु शहर में जाकर भिक्षा मांगने की सोचते हैं क्योंकि साधुओं का धर्म होता है मांग कर खाना, इसलिए वह शहर जाकर भिक्षा मांगने की सोचते हैं

जब तीनों साधू शहर की तरफ जा रहे थे तभी चौथा अज्ञानी साधू भी उनके साथ जाने  के लिए कहता है तभी घमंडी विद्वान् साधु उसे अपने साथ ले जाने से मना कर देते हैं और कहते हैं तुम्हारे पास कोई ज्ञान नहीं है इसलिए तुम भिक्षा मांगने में सक्षम नहीं हो

पर चौथा  साधू यह कहता है कि मैं आप सभी के लिए काम कर दिया करूंगा मुझे अपने साथ ले चलो तीनों विद्वान साधु सोचते हैं यह बढ़िया रहेगा यह हमारे काम कर दिया करेगा और वह चारों शहर की तरफ चल देते हैं

चलते चलते उन्हें जंगल से गुजरना पड़ता है जब जंगल में थोड़ा अंदर जाते हैं तब उन्हें एक हड्डियों का कंकाल मिलता है सभी यह सोचने लगते हैं कि यह किस जानवर का कंकाल है तभी उनमें से एक साधु कहता है देखो मैं अपने जादुई मंत्र से इस हड्डियों के ढांचे को खड़ा करके दिखाता हूं

वह साधु जादुई  मंत्र पढता है और हड्डियों का ढांचा खड़ा हो जाता है जो एक शेर का ढांचा बन जाता है तभी उनमें से एक दूसरा साधु कहता है अब तुम  मेरे ज्ञान को देखो मैं इस हड्डियों के ढांचे को पूरी तरह से एक शेर बना देता हूं

इस तरह से दूसरा साधु मंत्र पड़ता है और हड्डियों का ढांचा एक शेर के रूप में बदल जाता है पर  शेर के अंदर जान नहीं होती तभी तीसरा साधु जो सबसे ज्यादा घमंडी होता है कहता है अब तुम मेरे मंत्र को देखो जिससे मैं इस निर्जीव शेर के अंदर जान फूंक देता हूं

और तीसरा साधु जैसे ही मंत्र पढ़ रहा होता है तभी चौथा अज्ञानी साधु कुछ बोलने की कोशिश करता है तभी बाकी दो साधू अज्ञानी साधुओं को जादुई मंत्र का ज्ञान ना होने के बारे में बोलकर उसे चुप रहने के लिए बोलते हैं

पर चौथा साधु समझदार होता है और वह समझ जाता है कि अब यहां पर कुछ गड़बड़ होने वाला है और वह जल्दी से जाकर पेड़ के ऊपर चढ़ जाता है  तभी शेर के अंदर जान आ जाती है

और शेर जैसे ही अपने सामने तीन इंसानों को देखता है वह तीनों के ऊपर छलांग लगा देता है और तीनों साधुओं को मारकर खा जाता है चोथा साधू  पेड़ के ऊपर बैठकर यह सब कुछ देख रहा होता है

और जब शेर वहां से चला जाता है तब वह वापस अपने गांव चल जाता है और कहता है कि ऐसा ज्ञान किस काम का जो आपको पूरी तरह से खत्म कर दें अगर आपके पास ज्ञान है तो आपको कभी भी घमंड नहीं करना चाहिए

क्योंकि जिस दिन आपका ज्ञान आपके लिए आपका घमंड बन जाता है उस समय आपका बुरा समय शुरू हो जाता है (kahani)

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