Jadui nagri ki kahani | dadi maa ki kahani

jadui nagri- एक गांव में एक व्यापारी रहता था जो बहुत ही ज्यादा अमीर (rich) था  व्यापारी के बहुत सारे व्यवसाय थे जिसकी  वजह से व्यापारी  बहुत ही ज्यादा अमीर हो गया था और व्यापारी के पास बहुत सारे नौकर (servant) भी थे जो दिन-रात  व्यापारी के लिए काम करते थे

 उनमें से एक होनहार नौकर बलदेव हमेशा व्यापारी के साथ रहता था व्यापारी का एक छोटा सा लड़का (son) भी था जो बहुत ही ज्यादा शरारती था  एक दिन जब व्यापारी का बहुत सारा माल दूसरे शहर (city) से नदी के रास्ते आने वाला था तब व्यापारी समुद्र किनारे गया

उस दिन वह अपने छोटे लड़के को लेकर गया था नाव आने में थोड़ी देर (late) हो गई जिसकी वजह से छोटा लड़का परेशान हो गया और कहने लगा पापा चलो घर वापस चलते हैं और व्यापारी ने कहा नहीं मैं यहां काम से आया हूं जब तक मेरा जहाज (boat) नहीं आता मैं यहां से वापस नहीं जाऊंगा

 तुम थोड़ी देर और रुको हम साथ में वापस चलेंगे छोटा लड़का गुस्सा (angry) हो जाता है और वह जाकर नदी में छलांग लगा देता है क्योंकि तैरना नहीं आता था छोटा बच्चा डूबने लगता है यह देखकर व्यापारी (businessman)  बहुत तेज चिल्लाने लगता है और कहता है कोई मेरे बच्चों को बचा लो

और व्यापारी का कोई भी नौकर नदी में नहीं कूदता (jumb) लेकिन व्यापारी का सबसे होनहार नौकर बिना कुछ सोचे समझे नदी में छलांग लगा देता है और व्यापारी बच्चों को बचा कर ले आता है इस तरह से व्यापारी  बहुत ही ज्यादा खुश (happy) होता है और कहता है तुमने मेरे बच्चे की जान बचाई है बोलो तुम्हें क्या चाहिए

बलदेव कहता है साहब मुझे कुछ भी नहीं चाहिए मैं आपका नौकर हूं और यह मेरा फर्ज (duty) था  पर व्यापारी खुश होकर कहता है जाओ मैंने तुम्हें यह नाव  जो माल से भरा हुआ है मैं तुम्हें देता हूं तुम इसे बेचकर बहुत ही अमीर बन जाओगे और अपनी जिंदगी (life) अच्छे से गुजार सकते हो

dadi maa ki kahani

बलदेव यह सुनकर बहुत ही ज्यादा खुश होता है और कहता है साहब (sir) आपका बहुत-बहुत शुक्रिया मैं आपका बहुत ही ज्यादा आभारी रहूंगा इस तरह बलदेव उस नाव को लेकर शहर की तरफ रवाना हो जाता है सफ़र बहुत लम्बा (long) होता है 

 पर एकदम से तूफान (storm) आ जाता है जिसकी वजह से नाव पानी में डूब जाती है और बलदेव किसी तरह से अपनी जान बचाकर नदी किनारे पहुंचता है पर वह एक ऐसे टापू पर पहुंच चुका था जो उसके लिए पूरा अनजान (strange) था उसके पास अपने खाने पीने के लिए कुछ भी नहीं था 

 और जब वह टापू (jadui nagri) पर आगे बढ़ता है तो वहां पर जंगल ही जंगल होता है पर थोड़ी दूर चलने के बाद बलदेव को एक महल नजर आता है बलदेव जैसे ही महल के अंदर जाता है महल के अंदर के लोग बलदेव को महाराज कहकर पुकारने लगते है 

बलदेव यह सब देखकर हैरान (shocked) हो जाता है और कहता है मैं तुम्हारा महाराज नहीं मैं तो एक गरीब इंसान हूं और वह सभी लोग बलदेव को महराज की कुर्सी पर बैठा देते हैं और इस तरह से बलदेव को लगता है कि मुझे इस राजा कि उपाधि  को स्वीकार (accept) कर लेना चाहिए

और इस तरह से बलदेव  वहां का राजा बन जाता है और बलदेव वहां के लोगों से पूछता है कि आखिर मुझे यहाँ का राजा क्यों बनाया गया है तो वहां के लोग कहते हैं महाराज हम हर साल इस जादुई नगरी में यहां पर एक नया राजा (king) बनाते हैं जो भी व्यक्ति इस गांव में नया आता है उसे यहां का राजा बना दिया जाता है

और उसके 1 साल पूरा होने पर रेगिस्तान (desert) में छोड़ दिया जाता है जहां पर कुछ भी नहीं मिलता और वह वहां पर भटक कर मर जाता है यह सब सुनकर बलदेव हैरान  हो गया और कहने लगा यह कैसी प्रथा (culture) है पर गांव के लोगों ने कहा महाराज आप जब तक यहां पर रहेंगे आपको पूरी तरह से महाराज की तरह ही माना जाएगा पर एक साल  (year) बाद आपको यहां से जाना पड़ेगा

 इस तरह से बलदेव ने सोचा मुझे इसका कोई इलाज (solution) ढूंढना होगा इस तरह बलदेव  बड़े ही आराम से राज्य (state) में राज करता रहा,  खाता रहा पीता रहा और लोगों की बातों को सुनता रहा और इस तरह धीरे धीरे करके पूरे 1 year बीत गए

और फिर गांव के लोगों ने बलदेव से आकर कहां महाराज आप के 1 साल पूरे हो चुके हैं अब आपको हम उस रेगिस्तान में जाकर छोड़ेंगे बलदेव ने कहा ठीक है मैं उस जगह पर जाने के लिए तैयार (ready) हूं

 और सभी लोग रेगिस्तान की तरफ चल देते है पर जब गांव वाले रेगिस्तान (desert) के पास पहुचते है तो उन्होंने देखा वहां कोई रेगिस्तान था ही नहीं बल्कि (actually) वहां तो एक बहुत ही हरा भरा गाव था वह सब (everyone) यह देख कर हैरान हो गए और फिर बलदेव ने कहा

तुम्हें क्या लगता था मैं बाकी राजाओं की तरह आलसी (lazy) राजा थोड़ी बनूंगा मैंने पहले दिन से ही इस रेगिस्तान को एक हरे भरे गांव में बदलने के बारे में सोच लिया था इसलिए मैंने गांव के कुछ बहुत ही ज्यादा मेहनती (hard working)  लोगों को  इस रेगिस्तान में घर बनाने और पेड़ लगाने का काम सौंप दिया था

 सभी की कड़ी मेहनत के बाद से रेगिस्तान पूरी तरह से एक खुशहाल (happy village) गांव के रूप में बस गया है यहां पर वह सभी गरीब लोग रहते हैं जिनके पास कोई भी घर नहीं था

 इस तरह से गांव के लोग बहुत ही ज्यादा खुश होते हैं और बलदेव को हमेशा के लिए वहां का राजा मान लिया जाता है और आगे चलकर बलदेव बहुत ही अच्छा राजा साबित होता है 

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