Champak stories in hindi | champak kahaniya in hindi

 

Champak kahaniya – एक बहुत ही अमीर व्यापारी था उसके पास पैसों की बिल्कुल भी कमी नहीं थी क्योंकि उसका व्यवसाय (Bunsiess) काफी बड़ा था लेकिन अब यह अमीर व्यापारी  बूढ़ा हो रहा था और उसके तीन लड़के थे इसलिए उसने सोचा अब मुझे अपने इस व्यवसाय को अपने तीनों पुत्रो  में से किसी एक पुत्र को उत्तराधिकारी बनाना होगा व्यापारी के सबसे बड़े पुत्र (son) का नाम राम था उससे छोटे पुत्र का नाम श्याम और सबसे छोटा पुत्र चंपक था 

 

पर व्यापारी किसी भी बेटे के साथ किसी भी तरह का अन्याय (wrong) नहीं होने देना चाहता था इसलिए वह पूरी तरह से  दुविधा में था कि किस पुत्र को इसे बड़े व्यवसाय का उत्तराधिकारी बनाया जाए इसलिए 1 दिन व्यापारी ने अपने तीनों पुत्र को पांच 5-5 किलो गेहू (wheat) देकर कहा मैं कुछ महीनों (month) के लिए शहर जा रहा हूं

 

 तुम तीनों में से जो भी गेहूं को पूरी तरह से सुरक्षित (secure) रखेगा उसी को मेरे व्यवसाय का उत्तराधिकारी बनाया जाएगा इस तरह से व्यापारीकुछ महीनों के लिए शहर चला गया 

 

अब सबसे बड़े पुत्र राम ने सोचा मुझे  इस गेहूं को अगले कुछ महीनों तक सुरक्षित रखना है तो क्यों ना मैं इसे घर में कहीं पर छुपा (hide) दूं और राम ने गेहूं को अपने घर में एक ऐसे सुरक्षित जगह पर छुपा दिया जहां पर कोई नहीं जा सकता था

 

 और दूसरे पुत्र श्याम ने सोचा क्यों ना मैं इससे खेती करूं और इस 5 किलो गेहूं को बहुत सारा गेहूं बना दूं और श्याम ने खेतों में जाकर गेहूं को डाल दिया पर उसने उसकी बिल्कुल भी देखभाल (care) नहीं की उसे बस एक बार खेत में डालकर छोड़ दिया

 

 पर तीसरा पुत्र चंपक बहुत ही ज्यादा समझदार (sincere) था उसने सबसे पहले सबसे अच्छे उपजाऊ खेत की तलाश की और उसके बाद अकेले ही दिन रात मेहनत किया और उसके बाद अपनी फसल को वहां पर लगाया और कुछ महीने बाद  फसल (crops) लहराने लगी

 

 उस समय कुछ दिनों बाद  उनके पिताजी (father) आ गए और उन्होंने देखा कि उनके सभी पुत्र बहुत ही ज्यादा खुश हैं तभी व्यापारी ने पूछा कि क्या मैं देख सकता हूं कि तुमने 5-5किलो गेहूं का क्या किया

 

 तब राम अपने पिताजी को घर के उस हिस्से (part) में लेकर गया जहां पर उसने गेहूं को छुपाया था पर गेहूं ठीक से ना रखे जाने के कारण उसमें कीड़े (insects) लग गए थे अब दूसरे पुत्र श्याम की बारी थी शाम अपने पिताजी को उस खेत में ले गया जहां पर उसने गेहूं को डालकर छोड़ दिया था

 

 जब वो वहां पर गए तो देखा कि कि वह पूरी तरह से सड़ (rotten) चुका था क्योंकि पानी बहुत ही ज्यादा डाल दिया गया था अब बारी थी champak की, चम्पक अपने  पिताजी को अपने उस खेत में ले गया जहां पर उसने फसल उगाई थी

 

 जब उसके पिताजी ने देखा खेतों में फसल लहरा रही है उसके पिताजी देखकर खुश (happy) हो गए और उन्होंने कहा  कि बेटा चंपक तुम ही मेरे व्यवसाय के असली उत्तराधिकारी (successor)  हो और तुम्हारे दोनों भाई तुम्हारी इस व्यवसाय को सँभालने में  मदद करेंगे

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चंपक नाम का जंगल था जहां पर हर तरह के जानवर खुशी  खुशी रहते थे सभी में बहुत ही अच्छी एकता (unity) थे इसी तरह से वहां पर एक पक्षियों का झुंड था जो हमेशा  एक दूसरे की सहायता (help) करते थे अगर कोई किसी दिन भूखा रहता था तो दूसरा उसे खाना लाकर दे देता था या फिर कोई बीमार (sick) होता था तो ऐसे में जड़ी बूटियां लाकर दे देता था सभी पक्षियों ने अपना घोंसला एक बहुत ही ऊंचे और बड़े बरगद के पेड़ पर बना रखा था 

 उन पक्षियों के दल का नेता एक बहुत ही बुढा पक्षी था जो सबसे ज्यादा समझदार और बुद्धिमान (wise) था  बसंत के मौसम में सभी पक्षियों ने एक साथ अंडा (egg) दिया और सभी के घर में एक साथ खुशियां आई सभी बहुत ही ज्यादा खुश थे क्योंकि उनके घरों में छोटे-छोटे मेहमान आने वाले थे

 

 हमेशा की तरह सभी पक्षियों खाने (food) की तलाश में खेतों की तरफ गए पर उस दिन जंगल में शिकारी आ गया और उसने देखा कि ऊंचे बरगद के पेड़ पर बहुत सारे पक्षियों ने अपना घोंसला बना रखा है पर उसने देखा इस बरगद के पेड़ पर चढ़ना तो पूरी तरह से नामुमकिन (impossible) है

 

 कुछ समय बाद जब सभी पक्षीया अपने घोसले (nest) में वापस आए तब उन्होंने देखा उनके घोसले से उनके अंडे गायब थे अब सभी यह देखकर हैरान हो गए थे कि इतने ऊंचे बरगद के पेड़ पर आखिर शिकारी (hunter) चढ़ा कैसे और उसने हमारे अंडे कैसे चुरा लिया

 

 सभी बहुत तेज तेज से रोने और चिल्लाने (cry) लगे क्योंकि उन सभी ने अपना अंडा खो दिया था और उसे पाने का कोई और तरीका था ही नहीं क्योंकि शिकारी सभी अंडे को लेकर जा चुका था लेकिन पक्षी दल का नेता बुढा पक्षी यह तलाश (find) कर रहा था कि आखिर शिकारी इस उच्च बरगद के पेड़ पर चढ़ा कैसे

 

घंटो तक जांच पड़ताल (analysation) करने के बाद बूढ़े पक्षी ने देखा कि बरगद के पेड़ से कुछ ही दूरी पर एक दूसरा पेड़ है जो ऊपर जाकर बरगद के पेड़ से मिलता है तब वह समझ गया कि शिकारी (hunter) बरगद के पेड़ पर चढ़ा ही नहीं बल्कि वह तो उस दूसरे पेड़ के माध्यम (through)  से इस पेड़ पर चढ़ा 

 

तब बुढा पक्षी (leader) समझ गया था कि उन्हें या तो अपना यह घोंसला (House) किसी और पेड़ पर बनाना होगा या फिर उन्हें यह दूसरा पेड़ जो सिर्फ कुछ ही सालों पहले उगा है उसे वहां से हटाना होगा क्योंकि पूरे जंगल में और भी कोई दूसरा सुरक्षित (secure) पेड़ नहीं था इसलिए सब ने उस दूसरे पेड़ को उखाड़ने की सोची

 

सभी पक्षियों में बहुत ही एकता थी और उन्होंने अपना एक अंडा भी खोया (lose) था इसलिए अब वह किसी भी तरह से अपने दूसरे अंडे को खोना नहीं चाहते थे इसलिए उन्होंने एक योजना (plan) बनाई  कि हर रोज सभी मेहनत करके दूसरे पेड़ की जड़ों (roots) की मिट्टियों को थोडा थोडा हटाते रहेंगे

 

सभी हर रोज सुबह से लेकर शाम तक उस पेड़ की जड़ों से  मिट्टी (soil) को उठाकर दूसरी जगह पर हटाते थे  इस तरह से उन्होंने लगभग 1 महीने तक एक साथ काम किया और एक महीने बाद वह पेड़ जमीन (earth) पर गिर गया इस तरह से इनकी एकता ने इनके आने वाली पीढ़ी को बचा लिया

 

 कुछ समय बाद इन्होंने दोबारा अंडा दिया और शिकारी (hunter) दोबारा आया पर इस बार पेड़ पर चढ़ने का कोई और तरीका था ही नहीं

इस तरह हमें इस कहानी से शिक्षा (moral) मिलती हैं कि कई बार ऐसा होता है हम किसी कार्य को अकेले नहीं कर पाए पर अगर हम एक साथ मिल जाए तो हम किसी भी कार्य को कर सकते हैं जिस तरह से दिल्ली में डेंगू (dengue) के अभियान को, हम सभी लोगों के साथ मिलकर काम करने से ही सफल बनाया जा चुका है और इस साल डेंगू कि मरीजों की संख्या काफी हद तक कम रही है 

 

आपको हमारी यह कहानी कैसी लगी आप हमें comment करके जरूर बताएं और यह भी जरूर बताएं कि आपको इस कहानी से क्या शिक्षा मिलती हैं 

 

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