Birbal ki chaturai ki kahaniya | चतुर बीरबल

Chatur birbal- एक दिन राजा अकबर को अपने दरबारियों (guards) के साथ आजमगढ़ जाना पड़ा आजमगढ़ राजा अकबर के राज्य से बहुत दूर था ऐसे में  राजा अकबर को एक पालकी में बैठाया गया ताकि उन्हें रास्ते में कोई दिक्कत ना हो क्योकि रास्ता (route) काफी ज्यादा लंबा था राजा अकबर अपने दरबारियों के साथ चल दिए 

 सब कुछ बहुत अच्छा चल रहा था  रास्ता लगभग 2 दिन का था और राजा अकबर रास्ते (route) में रुक रुक कर चल रहे थे ताकि आसानी से पहुंचा जा सके बहुत ही ज्यादा गर्मी  (hot) का मौसम था और दरबारी भी गर्मी से बहुत ज्यादा परेशान थे

 

 पर कुछ समय बाद राजा अकबर बहुत बुरी तरह से थक (tired) चुके थे क्योंकि वह बहुत लंबे अरसे से उस पालकी में सफर कर रहे थे और वह किसी भी हालत में जल्दी आजमगढ़ पहुचना चाहते थे पर सच्चाई (truth) तो यह थी कि आजमगढ़ पहुंचने का कोई भी छोटा रास्ता था ही नहीं

 पर फिर भी राजा अकबर ने कहा मैं अभी और सफ़र नहीं कर सकता मुझे जल्दी से जल्दी आजमगढ़ पहुंचना है कोई छोटा रास्ता (shortcut) जानता है तो जल्दी बताओ पूरे दरबारियों में से कोई भी किसी भी प्रकार का कोई भी छोटा रास्ता (shortcut) नहीं जानता था

 

 सभी बिल्कुल शांत हो गए  बीरबल बोले मुझे एक छोटा रास्ता पता है यह सुनते ही राजा अकबर बोले जल्दी बताओ मुझे जल्दी से आजमगढ़ पहुंचना है पर बीरबल ने एक शर्त (bat) रखी कि महाराज आपको मैं छोटा रास्ता बताने से पहले एक कहानी (Story) सुनाना चाहूंगा  महाराज ने कहा ठीक है तुम मुझे कहानी सुना सकते हो

 उसके बाद बीरबल में कहानी  सुनाना शुरू किया और कहानी बहुत ही ज्यादा रोमांचक (interesting) थी जिसे ना सिर्फ महाराज ने सुना बल्कि सभी दरबारियों ने भी बड़े ही मनोरंजन के साथ सुना और जैसे ही कहानी खत्म (finish) हुई महाराज ने अपने आपको आजमगढ़ में पाया

 

 और महाराज बिल्कुल हैरान हो गए और कहने लगे क्या बात है मुझे तो रास्ते का पता (observed) ही नहीं चला और मैं कितनी जल्दी आजमगढ़ आ गया

 तब बीरबल ने बताया महाराज दरअसल (Actually) कोई छोटा रास्ता था ही नहीं बल्कि हम उसी रास्ते से आए हैं जिस रास्ते से आने वाले थे बस बात यह है कि मैंने एक ऐसी मनोरंजक (Interesting) कहानी सुनाई थी आपको रास्ते का पता ही ना चला और हम आजमगढ़ आ गए

 इस तरह महाराज ने बीरबल की चतुराई (wise) को बहुत ही सराहा 

 

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birbal ki chaturai

एक बार एक गांव वाले को महाराज ने मुंशी की नौकरी (job) दी  पर बीरबल इससे बिल्कुल भी सहमत (Agree) नहीं थे उनका कहना था कि महाराज यह इंसान भरोसेमंद नहीं लगता हमें इस पर विश्वास नहीं करना चाहिए पर महाराज ने बिरबल की नहीं सुनी और कहा तुम फालतू में इस पर शक (doubt) कर रहे हो ऐसा कुछ भी नहीं होगा

 

पर कुछ ही दिनों बाद महाराज के पास उस मुंशी की शिकायतें (complain) आने लगी महाराज को कहीं ना कहीं शक होने लगा बीरबल कहीं ना कहीं सही कह रहा था पर फिर महाराज ने सोचा चलो इसको किसी ऐसे जगह (work) पर लगा दिया जाए जहां पर रिश्वत लिया ही नहीं जा सकता

 

 और उसके बाद मुंशी को उस जगह पर लगा दिया गया जहां पर घोड़ों की देखभाल (care) की जाती थी और यहां पर रिश्वत लेना लगभग नामुमकिन था और मुंशी बहुत ही ज्यादा होशियार था और उसने देखा कि जो इंसान घोड़ों को खाना देता है उसे डरा कर रिश्वत (bribe) लिया  जा सकता है और उसने कहा कि तुम घोड़ों को बहुत ही कम खाना (Food) देते हो  मैं इसकी शिकायत महाराज अकबर से कर दूंगा

 यह सुनते ही घोड़े को खाना देने वाला दरबारी मुंशी को हर घोड़े के हिसाब से ₹1 देने लगा और इस तरह से कुछ दिनों बाद राजा को इसकी भी खबर (news) हो गई और इस बार महराज ने उसे नदी के किनारे नाव  (boat)की देखरेख में लगा दिया

 

पर मुंशी का दिमाग  (tricky mind) यहां भी दोड़ गया और उसने नाव को रोकना शुरू कर दिया और जिसकी वजह से नाव को 2 से 3 दिन तक रुकना पड़ जाता था और उनका समय खराब (waste)  हो रहा था जिसकी वजह से वह सभी मुंशी को हर रोज दो ₹2 देने लगे और इस तरह से  मुंशी ने यहां पर भी रिश्वत का काम शुरू (start) कर दिया

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और जब इसकी खबर महाराज को हुई तो राजा अकबर ने उस व्यक्ति को नौकरी से निकाल (fired) दिया और बीरबल से कहा कि तुम बिल्कुल सही थे तुम्हारी लोगों की परखने (Analyse) की क्षमता बिल्कुल सही है

और इस तरह से बीरबल को शाबाशी दी गई 

 

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