bhoot pret ki kahani

एक समय की बात है रामनगर गांव में आरती नाम की लड़की रहा करती थी (bhoot ki kahani) वह बहुत ही चंचल और खुशमिजाज थी आरती को घूमना बहुत ही पसंद था इसलिए आरती ने गांव का चप्पा चप्पा घूम रखा था

कुछ दिनों के बाद आरती के लिए गांव में घूमने के लिए कोई जगह नहीं बची थी और अब आरती सोच रही थी अब तो मैंने गांव की हर एक जगह घूम ली है अब कहां घूमने जाऊं

परंतु गांव के बाहर वाला जंगल अभी तक नहीं घुमा था और वह अगले दिन वहां जाने का निर्णय लेती है और अगले दिन आरती जंगल की ओर अकेले निकल जाती है और काफी देर तक चलने के बाद आरती उस घने जंगल के पास पहुंच जाती है और वह पर भिन्न भिन्न प्रकार के जीवो को देखकर आनंद उठती है

bhoot wali kahani
bhoot wali kahani  /bhoot

कुछ समय बाद खुद से ही कहती है यहां तक आते आते ही मुझे बहुत देर हो चुकी है और अपने आप से कहती है कि आज आधा जंगल ही घूमना चाहिए क्योंकि अगर मैं पूरा घूमती हु तो घर जाने में रात हो जाएगी पर आरती थोडा और घुमने के लिए सोचती है

आरती जंगल के अंदर चलने लगती है जंगल का नजारा देख वह बहुत खुश हो जाती है घने घने पेड़ और जानवरों का जोर उसे बहुत भाता है इसलिए धीरे-धीरे वह जंगल के काफी अंदर चली जाती है और वह जंगल के नजारे में इतना खो जाती है कि उसे समय का पता ही नहीं चलता और जब वह सूर्य को डूबता हुआ देखती है

तब उसे समय का अंदाजा होता है और फिर वह सोचने लगती है अब थोड़ी देर में रात हो जाएगी और घर जाने में देरी हुई तो मम्मी मुझे नहीं छोड़ेगी और वापस घर की ओर चलने लगती है और जैसे ही वह घर की ओर जाने वाला रास्ता ढूंढती है तो उसे यह एहसास होता है कि वह रास्ता भूल चुकी है और जिसके बाद वह घबरा जाती है और फिर वह अपने आप से ही कहती है

अब मैं क्या करूं और अब मैं घर कैसे जाऊंगी और भगवान से मदद मांगने लगती है आरती को जो भी रास्ता दिखता वह उसी पर चल देती थी परंतु कोई भी रास्ता उसे जंगल से बाहर नहीं ले जा रहा था और रात भी हो चुकी थी

लेकिन आरती रात में भी रस्ते के तलाश जंगल में भटक रही थी काफी देर तक कोशिश करने के बाद उसे कोई रास्ता नहीं मिला तो वह थक कर एक पेड़ के नीचे बैठकर रोने लगी तभी आरती को एक आवाज सुनाई देती है और आरती उस अजनबी आवाज की तरफ देखती है

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तो वह देखती है कि एक बूढा आदमी उसके बगल में खड़ा है और वह बूढ़ा आदमी कहता है क्या हुआ बेटा रास्ता भूल गए हो कोई बात नहीं मेरा गांव पास ही में है तुम मेरे साथ वहां चलो और सुबह होते ही अपने गांव चले जाना

आरती उस बूढ़े आदमी से कहती है कि सच में आपका गांव पास में ही है क्योंकि मैं तो इस जंगल में बहुत देर से घूम रही हूं परंतु मुझे कोई गांव नहीं दिखा और आरती उस बूढ़े आदमी के साथ उसके गांव की तरफ चल जाती है और गांव में पहुंचने के बाद वह देखती है कि चारों तरफ उजाला ही उजाला है

लोग एक दूसरे से बातें कर रहे हैं और आरती उस बूढ़े आदमी से कहती है की पहली बार मैं इस गांव के बारे में सुन रही हु और देख रही हूं और बूढ़ा आदमी आरती से कहता है कि तुम जंगल में घूम घूम कर थक गई होगी चलो मेरे घर में आराम कर लो घर पहुचते ही आरती थोड़ी ही देर में सो जाती है

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bhooton ki kahani
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और थोड़ी देर बाद कुछ आवाज सुनने के कारण वह जग जाती है और खिड़की से देखती है कि यह आवाज कहां से आ रही है और  वह देखती है कि कि गांव के लोग आग के अगल बगल हवा में घूम रहे हैं यह सब देखने के बाद आरती डर जाती है और समझ जाती है ये भूतो का गाव है और वो बुरी तरह से फस चुकी है

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और गांव से भागने की योजना बनाने लगती है और जैसे ही गांव से भागने लगती है वह बूढ़ा आदमी उसके सामने आकर खड़ा हो जाता है और आरती से कहता है कहां जा रही हो और बूढ़ा आदमी कहता है अभी तो रात हो रही है सुबह चले जाना परंतु आरती जिद करने लगती है कि मुझे अभी जाना है और बूढ़ा आदमी समझ जाता है और कहता है

 क्या तुम बाहर वाले लोगों को देखकर डर रही हो आरती कहती है हां और इतना देख कर कोई कैसे यहां पर रुक सकता है और बुढा आदमी कहता है डरो मत हम लोग तुम्हें कुछ नहीं करेंगे इतना सुनते ही आरती और डर जाती है और पूछती है क्या आप भी उन्हीं लोगों में से एक हो बूढ़ा आदमी जवाब देता है हां मैं भी उन्हीं लोगों में से हूं

आरती पूछती है कि तुम लोग कौन हो और यहां पर क्या कर रहे हो फिर बूढ़ा आदमी कहता है कि यह भूतों का गांव है और यह गांव सिर्फ रात में ही दिखाई देता है और दिन में गायब हो जाता है क्योंकि हमारी शक्ति सिर्फ रात में ही काम करती है और यहां पर रहने वाला हर एक आदमी भूत है

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परंतु आरती एक और प्रश्न पूछती है कि तुम लोग मर चुके हो तो फिर आप लोगों को मुक्ति क्यों नहीं मिली और बूढ़ा आदमी कहता है जिनकी मृत्यु समय से पहले हो जाती है या उन्हें मार दिया जाता है या जिनका कोई अधूरा काम रह जाता है

उनके लिए यह गांव बनाया  है और जब भी आत्मा अपना काम पूरा कर लेती है या समय पूरा हो जाता है तब उसे मुक्ति मिल जाती है और इसी तरह आज एक हमारा दोस्त अपना काम पूरा करके स्वर्ग में जा रहा है इसलिए आज हम सभी मिलकर party कर रहे है

बूढ़ा आदमी कहता है की हम लोग शांति से रहना चाहते हैं यहाँ हर रोज मरने के बाद नए लोग आते रहते है और अपना काम पूरा करने के बाद चले जाते है

हम कभी किसी का बुरा नहीं करते फिर आरती पूछती है कि क्या किसी और को भी इस गांव के बारे में पता है तब बूढ़ा आदमी जवाब देता है कि तुम्हारी ही तरह हमने इस जंगल में से बहुत सारे लोगों की जान बचाई है परंतु हम उन लोगों की याददास मिटा दिया करते हैं

ताकि वह किसी और को इस गांव के बारे में न बता सके परंतु आरती बूढ़े आदमी से आग्रह करती है कि मेरी याददास मत मिटाना मैं यह याद रखना चाहती हूं कि जब मैं मुसीबत में थी तो मेरी मदद भूत ने की थी

बूढ़ा आदमी आरती से कहता है जाओ अब जाकर सो जाओ और सुबह तुम अपने घर पहुंच जाओगी और आरती सोने चली जाती है और जब सुबह उठती है तो वह देखती है कि वह अपने घर में सोई हुई है

और वह अपनी मम्मी से पूछती है कि मैं यहां कैसे आई तो उसकी मम्मी कहती है की रात में जब तुम घर नहीं आई तो सब गांव वाले तुम्हें खोजने के लिए जंगल में गए परंतु उन लोगों को तुम जंगल में बेहोश मिली और गांव वाले तुम्हें घर पर ले आए और फिर मम्मी उससे पूछती है कि तुम्हारी मदद किसने की

वह बात को टालने के लिए कहती है कि मेरी मदद भगवान ने की और वह सोचती है कि मुझे तो अभी तक सब कुछ याद है और मुझे लगता है कि मेरे आग्रह करने पर उन्होंने मेरी याददास नहीं मिटाई और आरती मन ही मन में कहती है कि सब ही भूत बुरे नहीं होते हैं

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पीपल का पेड़ का भूत (bhoot ki kahani)

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एक समय की बात है एक गांव के कुछ ही दूर पर एक बहुत पुराना पीपल का पेड़ था और उस पीपल के पेड़ पर एक भूतनी रहा करती थी और वह भूतनी सभी लोगों की इच्छा पूरी किया करती थी परंतु जो भी उससे इच्छा मांगता था वह भूतनी उसे बहुत परेशान करती थी

एक बार की बात है एक औरत अपनी एक इच्छा लेकर उस पीपल के पेड़ के पास गई और भूतनी से कहने लगी कि मेरी सांस मुझे बहुत परेशान करती है क्या तुम उस की बोलती बंद कर सकती हो

परंतु उस भूतनी ने उसकी सास की बोलती बंद करने की बजाय उस औरत को ही बहरा कर दिया जिसकी वजह से गांव का कोई भी आदमी उस भूतनी से कोई इच्छा नहीं मांगा करता था और ऐसे ही बहुत समय बीत गया और कोई भी अपनी इच्छा लेकर वहां नहीं गया

जिसके कारण उस भूतनी को अब बहुत गुस्सा आ रहा था कि गांव का कोई भी इंसान मेरे से बात करने और अपनी इच्छा पूरी करवाने नहीं आता है

इसीलिए उसने पेड़ पर बैठे एक उल्लू से कहा कि तुम गांव में जाओ और सभी लोगों से कहो की पीपल की भूतनी सभी की इच्छा पूरी करेगी और जल्दी से जल्दी लोगों को यहां बुलाकर लाओ उल्लू कहने लगा मेरी बात कौन सुनेगा और मैं तो एक उल्लू हूं परंतु उस भूतनी ने अपनी शक्ति से उसे एक बोलता चलता इंसान बना दिया और कहा अब तो तुम लोगों से बात भी कर सकते हो और उन्हें समझा भी सकते हो

वह उल्लू जो इंसान के रूप में था वह गांव की तरफ गया और लोगों से कहने लगा लो लो मिठाई खाओ पीपल की भूतनी ने मेरी इच्छा पूरी की और मुझे तो सोने के सिक्के मिले जिसकी वजह से आज मैं बहुत खुश हूं और इसी कारण मैं सभी लोगों को मिठाई बांट रहा हूं

यह लो आप लोग भी खाओ और अगर आप अपनी इच्छा पूरी करवाना चाहते हो तो जाकर पीपल की भूतनी से मिलो और अपनी इच्छा उनके सामने बोलो वहां खड़े सभी लोग उसकी बात सुनकर अनसुना कर देते हैं और कोई भी उसकी बात पर अमल नहीं करता है परंतु वहां से थोड़ी ही दूर पर सोहन नाम का एक आदमी था

जो यह सब सुन रहा था और जो बहुत ही जल्दी अमीर होना चाहता था रात के समय जब उसे कोई नहीं देख रहा था वह चुपचाप पीपल की भूतनी के पास जाता है और कहता है कि मुझे  200 सोने के सिक्के दे दो परंतु पेड़ की भूतनी कहने लगी अगर मैं तुम्हारी इच्छा पूरी करूंगी तो तुम्हें भी मेरी एक इच्छा पूरी करनी पड़ेगी सोहन ने बिना इच्छा सुने ही हां कह दिया

और बोलने लगा मुझे 200 सोने के सिक्के जल्दी दे दो पीपल की भूतनी ने सोहन को 200 सोने के सिक्के दे दिए और कहने लगी अब तुम्हारी बारी है और अब तुम मेरी इच्छा को पूरा करो सोहन कहने लगा बताओ अपनी इच्छा क्या है

भूतनी कहने लगी मुझे तुम्हारा शरीर चाहिए मैं इस पीपल के पेड़ पर रहते रहते थक गई हूं और मुझे एक नया शरीर चाहिए जिससे कि मैं इस पेड़ से छुटकारा पा सकूं सोहन डर गया और कहने लगा यह कैसी इच्छा है

परंतु भूतनी ने कहा तुमने वादा किया है और अब तुम्हें अपना शरीर मुझे देना ही होगा इतना कहते ही भूतनी ने कुछ मंत्र पढ़े और उसकी आत्मा पीपल के पेड़ से निकलकर सोहन के शरीर में चली गई और सोहन की आत्मा उस पीपल के पेड़ पर चली गई

सीख इसीलिए कहा जाता है किसी भी काम को सोच समझकर करिए और किसी से वादा करने से पहले उसकी शर्त आवश्यक सुन ले और लालच में आकर कोई गलत काम ना करें

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