baccho ki kahani

baccho ki kahani -एक समय की बात है शहर में एक फकीर रहा करते थे परंतु फकीर बाबा के दोनों हाथ न होने के कारण वह लोगों से खाना और पैसा मांग कर अपना जीवन जी रहे थे वह शहर में एक बगीचे में रहा करते थे और लोगों से खाना मांगने और पैसे मांगने के लिए फुटपाथ पर चले जाते थे

फकीर बाबा रोज फुटपाथ पर चले जाते थे ताकि उन्हें कुछ खाना या पैसा मिल जाए जिससे वह अपना जीवन काट सके कुछ दिनों से एक लड़का जो वहीं से अपने काम पर जाया करता था उसने बाबा जी को देखता था परंतु वह देखकर अनदेखा करके अपने काम पर चला जाता था

परंतु एक दिन उस लड़के की जल्दी छुट्टी हो जाती है और वह सोचता है चलो आज फकीर बाबा से कुछ पूछ ही लिया जाए वह लड़का फकीर बाबा के पास जाता है और कहता है बाबा मैं आपसे कुछ प्रश्न पूछना चाहता हूं बाबा सोचते हैं कि लगता है यह मेरे अपाहिज पन का मजाक उड़ाने आया है

बाबा कहते हैं पूछो वह लड़का पूछता है बाबा जी आपके दोनों हाथ नहीं है आपको बुरा नहीं लगता है और आपको नहीं लगता है कि लाइफ में कुछ नहीं है तभी फकीर बाबा उत्तर देते हैं मुझे नहीं लगता कि मेरी जिंदगी में किसी चीज की कमी है ऊपर वाले ने मुझको भले आधा-अधूरा शरीर दिया है

पर मैं इसकी कीमत जानता हूं और जैसा मुझे बनाया है मैं इस शरीर से भी खुश हूं तभी वह लड़का दूसरा सवाल पूछता है बाबा आपको भूख नहीं लगती लोग तो आपको पैसा देकर चले जाते हैं परंतु आप खाना कहां से खाते हो बाबा उत्तर देते हैं

वहां दूर खड़ा एक लड़का जब उसे फुटपाथ पर खाना नहीं मिलता है तब वह बस्तियों में चला जाता है और वहां से जितना भी खाना इकट्ठा करके लाता है उससे मैं थोडा खाना खरीद लेता हूं तभी लड़का तीसरा सवाल पूछता है बाबा आपके तो दोनों हाथ नहीं है आपको खाना कौन खिलाता है

baccho ki kahaniya

बाबा उत्तर देते हैं मैं आने जाने वालों लोगों से बस यही कहता रहता हूं ओ आने वाले जाने वाले ऊपर वाले आपके दोनों हाथ सलामत रखे मुझे खाना खिला दो बस यही कहता रहता हूं कुछ लोग तो बिना देखे ही चले जाते हैं परंतु उनमें से कुछ लोग तो बहुत अच्छे होते हैं जो मुझे खाना खिला कर भी जाते हैं और कभी कबार तो ऐसा होता है की एक ही इंसान 10 दिन लगातार आकर मुझे खिलाता है
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उस लड़के ने एक और सवाल पूछा बाबा जी आप पानी कैसे पीते हो बाबा ने बोला यह सामने रखा मटका देख रहे हो इसको मैं अपने पैर से पलट देता हूं और एक कटोरी में पानी भर लेता हूं और एक पशु की तरह पानी पी लेता हूं और वह लड़का बाबा जी से कहता है बाबा जी मेरा एक आखरी सवाल है

बगीचे में बहुत सारे मच्छर है (baccho ki kahani) आप सो कैसे जाते हो और अगर काटते हैं तो आप अपने आप को कैसे बचाते हो बाबा बोलते हैं जब भी मुझे मच्छर काटते हैं तब मैं जमीन पर लूटने लगता हूं जैसे तुमने मछली को तो देखा ही होगा जो पानी से बाहर निकलने पर इधर से उधर कूदने लगती है वैसे ही मैं भी इधर से उधर लोटने लगता हूं और क्या करूं बेटा यही मेरी जिंदगी है

जैसे ही बाबा ने अपनी सारी बात खत्म की तभी वह लड़का कहता है बाबा आपको ऐसी  जिंदगी पर लालत है आपके दोनों हाथ नहीं है और  आप एक जानवर से भी बेकार जिंदगी जी रहे हैं इतना सुनते ही फकीर बाबा गुस्सा हो गया और कहने लगा अब तक तुमने जितने भी सवाल पूछे और चाहे तुमने मेरा मजाक उड़ाया वह सब ठीक था

परंतु ऐसा कभी मत कहना की जिंदगी पर लालत है क्योंकि यह शरीर नसीब वालों को मिलता है जाकर उनसे पूछो जिनके दोनों हाथ नहीं है और पैर भी नहीं है और कोई उम्मीद नहीं है

वह लोग तुम्हें इस शरीर की कीमत बताएंगे और यह शरीर किस्मत वालों को मिलता है और इस शरीर का एक एक अंग कीमती है इस शरीर का मोल कोई लगा नहीं सकता चाहे दुनिया की कितनी भी दौलत इकट्ठा कर लो उससे यह शरीर बनाया नहीं जा सकता

Moral- हम इंसान जो पूरी तरह से सब कुछ करने में सक्षम है हमें ऊपर वाले का लाख लाख शुक्रिया अदा करना चाहिय

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